शेयर बाज़ार में लगातार दूसरे हफ़्ते तेज़ी, कच्चे तेल में गिरावट और बेहतर नतीजों से मज़बूत हुआ निवेशकों का भरोसा
भारतीय शेयर बाज़ार ने लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज की है। इस तेज़ी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें रहीं— अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ गिरावट और कंपनियों द्वारा पेश किए…
भारतीय शेयर बाज़ार ने लगातार दूसरे सप्ताह बढ़त दर्ज की है। इस तेज़ी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़ी वजहें रहीं— अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ गिरावट और कंपनियों द्वारा पेश किए गए उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इन सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का भरोसा मज़बूत किया, जिसके चलते बाज़ार में खरीदारी का माहौल बना रहा।
हालांकि, हफ़्ते के आख़िरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को मुनाफ़ावसूली का दबाव दिखा। सेंसेक्स 455 अंक (0.58%) गिरकर 78,499 पर और निफ्टी 0.27% की गिरावट के साथ 24,570 के स्तर पर बंद हुआ। इसके बावजूद, साप्ताहिक आधार पर दोनों प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 0.52% और निफ्टी में 0.77% की बढ़त दर्ज की गई।
छोटे-मझोले शेयरों का शानदार प्रदर्शन
इस हफ़्ते बड़े शेयरों की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने कहीं ज़्यादा बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स जहां 0.87% चढ़ा, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 2.73% का ज़बरदस्त उछाल देखा गया। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, मज़बूत तिमाही नतीजों और कंपनियों से जुड़ी सकारात्मक खबरों के चलते निवेशकों ने छोटे शेयरों में जमकर दिलचस्पी दिखाई। इसी तरह, बेहतर फंडामेंटल्स और वित्तीय प्रदर्शन के कारण सरकारी बैंकों (PSU Banks) के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी हुई।
किन वजहों से बाज़ार को मिला सहारा?
घरेलू और वैश्विक, दोनों स्तरों पर कई कारकों ने मिलकर बाज़ार को समर्थन दिया।
घरेलू कारक: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति में ब्याज दरों को स्थिर रखा। साथ ही, केंद्रीय बैंक ने GDP ग्रोथ का अनुमान थोड़ा बढ़ाया और महंगाई का अनुमान कुछ कम किया, जिससे अर्थव्यवस्था की मज़बूती का संकेत मिला। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के लिए जारी हो रहे कॉरपोरेट नतीजे भी ज़्यादातर कंपनियों के लिए उम्मीद से बेहतर रहे हैं, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा है।
वैश्विक कारक: कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट भारत के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि इससे महंगाई और आयात बिल का बोझ कम होता है। इसके अलावा, अमेरिका के श्रम बाज़ार के नरम आंकड़ों ने वहाँ ब्याज़ दरें बढ़ने की आशंका को कम कर दिया है। इसका असर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में नरमी के रूप में दिखा, जो भारत जैसे उभरते बाज़ारों में निवेश के लिए माहौल को बेहतर बनाता है।
आगे कैसी रहेगी बाज़ार की चाल?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाज़ार की दिशा तय करने में अमेरिका के रोज़गार और महंगाई के आंकड़े अहम भूमिका निभाएंगे, क्योंकि इससे अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की भावी नीतियों का अंदाज़ा लगेगा। घरेलू मोर्चे पर, निवेशकों की नज़र उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI), थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और बैंक क्रेडिट ग्रोथ के आंकड़ों पर रहेगी। ये आंकड़े अर्थव्यवस्था की सेहत और महंगाई की दिशा को और स्पष्ट करेंगे।
इनपुट: IANS



