स्वतंत्रता दिवस पर खालिस्तानी हमले का खतरा, खुफिया एजेंसियों ने पंजाब के लिए अलर्ट जारी किया
खुफिया एजेंसियों ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर खालिस्तान समर्थक तत्वों द्वारा हमले की साजिश को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन समूहों का…
खुफिया एजेंसियों ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर खालिस्तान समर्थक तत्वों द्वारा हमले की साजिश को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन समूहों का उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय पर्व पर सांकेतिक हमला कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचना है। इस खुफिया इनपुट के आधार पर पंजाब को हाई अलर्ट पर रखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
एजेंसियों का मानना है कि ये समूह काफी समय से पंजाब के कई हिस्सों में हमले की योजना बना रहे थे। एक खुफिया ब्यूरो के अधिकारी ने कहा, “खालिस्तानी ग्रुप पंजाब के कई हिस्सों में हमले की योजना बना रहे हैं। वो लंबे समय से इसकी तैयारी कर रहे थे।” अधिकारी के अनुसार, “खालिस्तान समर्थक आतंकी ग्रुप सांकेतिक हमला करना चाहता है इसलिए उन्होंने 15 अगस्त को चुना है।”
ऑनलाइन दुष्प्रचार और युवाओं को उकसाने की कोशिश
जमीनी हमले की आशंका के साथ-साथ, ये समूह ऑनलाइन दुष्प्रचार अभियान भी तेजी से चला रहे हैं। प्रतिबंधित संगठन 'सिख्स फॉर जस्टिस' (SFJ) के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू सोशल मीडिया पर खासा सक्रिय है। वह पंजाब के युवाओं को स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर खालिस्तानी झंडे फहराने के लिए उकसा रहा है। साथ ही, वह युवाओं से स्वतंत्रता दिवस पर भारत सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अपील भी कर रहा है। खुफिया एजेंसियां गुरपतवंत सिंह की ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़ी नजर रख रही हैं, जो मुख्य रूप से अलग प्रांत की मांग और भारत के खिलाफ 'हेट कैंपेन' पर केंद्रित हैं।
बढ़ती हताशा और ISI की भूमिका
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI पंजाब में खालिस्तान आंदोलन को फिर से जीवित करने की पुरजोर कोशिश कर रही है। हालांकि, भारत और कनाडा द्वारा गैंगस्टर-आतंकवादी नेटवर्क पर की गई हालिया कार्रवाइयों के कारण ये समूह खुद को बैकफुट पर पा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इसी बेचैनी और हताशा के चलते वे पंजाब में कोई बड़ी गड़बड़ी करने की फिराक में हैं। एक अधिकारी ने कहा, “बैन किए गए संगठन, सिख्स फॉर जस्टिस (एसएफजे) की गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।”
कनाडा और यूके जैसे देशों में बढ़ती सख्ती के बाद इन समूहों ने मलेशिया और अजरबैजान जैसे देशों में अपना आधार बनाने की कोशिश की, लेकिन मलेशिया ने इस साल जून में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) के सदस्यों को भारत को सौंपकर कड़ा रुख दिखाया। एजेंसियों के मुताबिक, इन कट्टरपंथी समूहों और उनके आईएसआई समर्थकों में बढ़ रही निराशा के कारण किसी बड़े हमले की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इनपुट: IANS



