कच्चा तेल और रुपया: अगले हफ्ते इन दो वजहों से कमोडिटी बाज़ार में हो सकती है बड़ी हलचल
आने वाला कारोबारी सप्ताह कमोडिटी बाज़ार के निवेशकों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाज़ार की दिशा तय करने में दो प्रमुख कारक निर्णायक भूमिका निभाएंगे — अंतरराष्ट्रीय…
आने वाला कारोबारी सप्ताह कमोडिटी बाज़ार के निवेशकों के लिए काफी अहम साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाज़ार की दिशा तय करने में दो प्रमुख कारक निर्णायक भूमिका निभाएंगे — अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों का उतार-चढ़ाव और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए की चाल। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों के अलावा पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी गतिविधियों पर भी निवेशकों की पैनी नज़र रहेगी।
कच्चे तेल में क्यों रही अस्थिरता?
पिछले सप्ताह वैश्विक तेल बाज़ार में भारी उठापटक देखने को मिली। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 1.29% की बढ़त के साथ 83.55 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। हालांकि, यह अभी भी पिछले सप्ताह के 90.12 डॉलर प्रति बैरल के बंद स्तर से काफी नीचे है। इसी तरह, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 78.18 डॉलर पर बंद हुआ, जो पिछले सप्ताह 84.67 डॉलर प्रति बैरल पर था।
विश्लेषकों के अनुसार, इस अस्थिरता की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम हैं, जो दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग है। सप्ताह की शुरुआत में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति का रास्ता अपनाने के संकेत से WTI क्रूड में तेज गिरावट आई थी। बाद में, इस जलमार्ग पर जहाजरानी को लेकर किसी समझौते की उम्मीद से कीमतों में थोड़ा सुधार हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई औपचारिक समझौता होता है तो कीमतों पर और दबाव आ सकता है, लेकिन तनाव बढ़ने पर कीमतें फिर से चढ़ सकती हैं।
घरेलू बाज़ार और तकनीकी स्तर
घरेलू मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चा तेल सप्ताह के दौरान 7,100 रुपए प्रति बैरल तक लुढ़कने के बाद सुधरा और करीब 7,400 रुपए के स्तर पर बंद हुआ। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, MCX क्रूड के लिए 7,500-7,550 रुपए का स्तर एक अहम प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) है, जबकि 7,380-7,300 रुपए का दायरा तत्काल समर्थन (सपोर्ट) का काम करेगा। यदि कीमतें इस समर्थन से नीचे जाती हैं, तो यह 7,250 रुपए और फिर 7,100-7,000 रुपए तक भी फिसल सकती हैं।
रुपए की चाल और भविष्य के संकेत
पिछले सप्ताह भारतीय रुपया मजबूत हुआ। डॉलर के मुकाबले यह लगभग 95.2 रुपए पर बंद हुआ, जबकि सप्ताह के दौरान यह 94.9 रुपए के निचले स्तर तक भी गया था। विश्लेषकों के मुताबिक, तकनीकी संकेतक फिलहाल रुपए के पक्ष में हैं। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) और एमएसीडी (MACD) जैसे इंडिकेटर डॉलर की तेजी में कमी का संकेत दे रहे हैं।
तकनीकी तौर पर, यदि USD/INR की दर 94.9 रुपए से नीचे बनी रहती है, तो रुपया और मजबूत होकर 94.7 से 94.5 रुपए के स्तर तक जा सकता है। वहीं, 95.2 से 95.4 रुपए का स्तर डॉलर के लिए एक मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र है, जिसके पार होने पर रुपया कमजोर होकर 95.7 रुपए तक जा सकता है।
इनपुट: IANS



