शनिवार, 8 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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असम में बाढ़ का कहर: 77,000 से ज्यादा लोग अब भी राहत शिविरों में, सरकार बोली- 'हालात पर कड़ी नज़र'

असम में बाढ़ की विनाशलीला के बाद हजारों लोग अब भी सामान्य जीवन में लौटने का इंतजार कर रहे हैं। राज्य भर में सरकार द्वारा संचालित राहत शिविरों में 77,000 से अधिक लोगों ने शरण ले रखी है, जो बाढ़ की…

असम में बाढ़ का कहर: 77,000 से ज्यादा लोग अब भी राहत शिविरों में, सरकार बोली- 'हालात पर कड़ी नज़र'
(फोटो: IANS)

असम में बाढ़ की विनाशलीला के बाद हजारों लोग अब भी सामान्य जीवन में लौटने का इंतजार कर रहे हैं। राज्य भर में सरकार द्वारा संचालित राहत शिविरों में 77,000 से अधिक लोगों ने शरण ले रखी है, जो बाढ़ की गंभीर स्थिति और मानवीय चुनौती को दर्शाता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य सरकार प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और बहाली के कामों में तेजी लाने का प्रयास कर रही है।

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मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशासन लगातार हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है। बाढ़ के कारण इस सीजन में असम के कई जिलों में घर, आजीविका और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।

सरकार का फोकस: राहत और पुनर्वास

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रभावित इलाकों में पुनर्वास और बहाली के कामों में तेजी लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन जहां भी जरूरत होगी, इन प्रयासों को और गति देगा। राज्य और जिला प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं, साथ ही बाढ़ से तबाह हुए जरूरी बुनियादी ढांचे और सेवाओं को फिर से स्थापित करने की कोशिशें भी जारी हैं।

बाढ़ से बाधित हुई सड़कों, संचार संपर्कों और अन्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करना सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा, राहत तंत्र के जरिए प्रभावित समुदायों तक लगातार मदद पहुंचाई जा रही है।

सतर्कता और निगरानी

अधिकारी बड़ी नदियों के जलस्तर और संवेदनशील इलाकों में तटबंधों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। कुछ जगहों पर स्थिति और बिगड़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे तब तक पूरी तैयारी बनाए रखेंगे जब तक कि बाढ़ का पानी कम न हो जाए और प्रभावित परिवार सुरक्षित रूप से अपने घरों को लौट सकें।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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