करूर भगदड़: सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का रास्ता खोला, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के करूर में 2025 में हुई एक भगदड़ के पीड़ितों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने के राज्य सरकार के फैसले पर लगी रोक हटा दी है। शुक्रवार को दिए एक अंतरिम आदेश में, शीर्ष अदाल…
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के करूर में 2025 में हुई एक भगदड़ के पीड़ितों के परिवारों को सरकारी नौकरी देने के राज्य सरकार के फैसले पर लगी रोक हटा दी है। शुक्रवार को दिए एक अंतरिम आदेश में, शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसने इन अनुकंपा नियुक्तियों को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था।
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के 27 जुलाई के फैसले को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की, "राज्य ने एक दुखद त्रासदी के बाद पीड़ित परिवारों को रोजगार देने की पेशकश की थी। इसके खिलाफ चुनौती क्यों?" पीठ ने यह भी सवाल किया, "राज्य द्वारा त्रासदी के पीड़ितों को रोजगार देने में दिक्कत क्या है?"
क्या था हाईकोर्ट का फैसला?
मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य सेवा के दौरान किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु पर परिवार को तत्काल आर्थिक राहत देना है। अदालत के अनुसार, इसे किसी सार्वजनिक त्रासदी के बाद आम पुनर्वास उपाय के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को नौकरी देने के सरकार के फैसले को रद्द कर दिया था।
2025 की वो दर्दनाक घटना
यह भगदड़ सितंबर 2025 में करूर में टीवीके नेता विजय की एक रैली के दौरान मची थी। अभिनेता-राजनेता की एक झलक पाने के लिए लगभग 30,000 समर्थकों और प्रशंसकों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। अधिकारियों के अनुसार, विजय को दोपहर 12 बजे पहुंचना था, लेकिन वह शाम 6 बजे के बाद पहुंचे, जिससे भीड़ अनियंत्रित हो गई। इस हादसे में 8 बच्चों सहित 41 लोगों की जान चली गई थी और 46 अन्य घायल हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट के इस नए आदेश के बाद अब तमिलनाडु सरकार पीड़ितों के परिवारों को नौकरी देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और मुकुल रोहतगी पेश हुए।
इनपुट: IANS



