मणिपुर: राहत शिविरों में 25 अप्राकृतिक मौतें, सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य सचिव से माँगी विस्तृत रिपोर्ट
हिंसा प्रभावित मणिपुर के राहत शिविरों में हुई 25 अप्राकृतिक मौतों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को शीर्ष अदाल…
हिंसा प्रभावित मणिपुर के राहत शिविरों में हुई 25 अप्राकृतिक मौतों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि रिपोर्ट में पोस्टमार्टम की जानकारी, मौत के कारणों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा ब्योरा शामिल होना चाहिए।
यह निर्देश भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने जारी किया। पीठ विस्थापित लोगों की मौतों और शिविरों में उन्हें हो रही अन्य कठिनाइयों से संबंधित जानकारी का अवलोकन कर रही थी।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश और सवाल
अदालत ने मणिपुर सरकार से कई अहम बिंदुओं पर स्पष्टीकरण माँगा है। शीर्ष अदालत ने एक रिपोर्ट पर गौर किया जिसमें आठ जिलों के राहत शिविरों में हुई मौतों का जिक्र था और इस पर सवाल उठाया कि केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम क्यों किया गया।
पीठ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि अखबारों में बताई गई सभी 25 अप्राकृतिक मौतों का विवरण प्रस्तुत किया जाए। इसके साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य संबंधित दस्तावेज़ भी रिकॉर्ड पर रखने को कहा गया है।
राज्य सरकार से माँगा जवाब:
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए क्या निवारक उपाय किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, अदालत ने उन खबरों पर भी स्पष्टीकरण मांगा है, जिनमें अप्राकृतिक मौतों के मामलों में परिवारों को केवल 20,000 से 30,000 रुपए का मुआवजा दिया गया।
कानूनी कार्रवाई और सुविधाओं पर जोर
अदालत ने मणिपुर कानूनी सेवा प्राधिकरण (Manipur Legal Services Authority) को तत्काल मामले की जाँच करने का निर्देश दिया है। प्राधिकरण को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि अप्राकृतिक मौतों के सभी मामलों में FIR दर्ज हो, मौत के कारणों का सही पता लगाया जाए और जिन मामलों में FIR पहले से दर्ज है, उनकी जाँच जल्द पूरी हो।
साथ ही, पीठ ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ और दैनिक जरूरत की सभी आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
इनपुट: IANS



