गुरूवार, 3 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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RBI की स्कीम का कमाल: डॉलर के मुकाबले रुपया 2 महीने के उच्चतम स्तर पर, जानिए क्या है वजह

भारतीय रुपये ने गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक बड़ी छलांग लगाई और यह दो महीने के सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, रुपये में 67 पैसे की यह बढ़त जून के बाद…

RBI की स्कीम का कमाल: डॉलर के मुकाबले रुपया 2 महीने के उच्चतम स्तर पर, जानिए क्या है वजह
(फोटो: IANS)

भारतीय रुपये ने गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक बड़ी छलांग लगाई और यह दो महीने के सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, रुपये में 67 पैसे की यह बढ़त जून के बाद एक दिन में आई सबसे बड़ी तेजी है। इस उछाल के पीछे मुख्य वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की एक विशेष योजना रही, जिसमें उम्मीद से कहीं ज़्यादा विदेशी मुद्रा का निवेश आया है।

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गुरुवार को जब कारोबार शुरू हुआ तो एक डॉलर की कीमत 94.30 रुपये थी, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 94.97 रुपये पर बंद हुआ था। दिन के कारोबार के दौरान दोपहर एक बजे यह 94.46 रुपये पर था।

विदेशी मुद्रा जुटाने की योजना सफल

रुपये को मजबूती देने के लिए RBI ने 8 जून को कुछ खास योजनाएं शुरू की थीं। इनमें से एक 'विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक)' यानी FCNR(B) जमा योजना थी, जिसे विदेशी निवेशकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। RBI का अनुमान था कि इस योजना से करीब 100 अरब डॉलर का निवेश आएगा, लेकिन 31 अगस्त, 2026 तक इसमें कुल 127 अरब डॉलर का भारी-भरकम निवेश दर्ज किया गया।

आरबीआई द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त तक FCNR(B) जमा में 127.226 अरब डॉलर आए। इसके अलावा, अन्य योजनाओं जैसे बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) के जरिए 3.891 अरब डॉलर और विदेशों से विदेशी मुद्रा में उधार (OFCB) के माध्यम से 5.260 अरब डॉलर का निवेश आया है।

आगे कैसी रहेगी रुपये की चाल?

FCNR(B) योजना में निवेश की आखिरी तारीख 31 अगस्त थी, लेकिन ECB और OFCB योजनाओं में निवेशक 31 दिसंबर, 2026 तक निवेश कर सकते हैं। मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी अवधि में रुपया 94.10 से 95.50 के दायरे में कारोबार कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर रुपया मजबूती के साथ 94.10 के स्तर को तोड़ता है, तो यह 93.50 के स्तर तक भी जा सकता है। विश्लेषकों के मुताबिक, विदेशी मुद्रा की मजबूत स्थिति से RBI को रुपये में बड़ी गिरावट रोकने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार को और बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इनपुट: IANS

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