गुरूवार, 3 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
अपराध

बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का मामला: दो मंत्रालयों से जवाब तलब, दिल्ली पुलिस को 15 दिन की मोहलत

बाल यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री के ऑनलाइन प्रसार के एक गंभीर मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने कड़ा रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आयोग ने इस मामले में…

बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का मामला: दो मंत्रालयों से जवाब तलब, दिल्ली पुलिस को 15 दिन की मोहलत
(फोटो: IANS)

बाल यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री के ऑनलाइन प्रसार के एक गंभीर मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने कड़ा रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, आयोग ने इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) से जवाब मांगा है, वहीं दिल्ली पुलिस को जांच के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है।

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यह कार्रवाई एक व्हिसलब्लोअर संगठन (बीबीसी) द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद हुई है। NCPCR के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बताया कि आयोग ने करीब डेढ़ महीने पहले ही मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर ऐसी सामग्री मौजूद है, तो यह स्पष्ट है कि बच्चों का यौन शोषण हुआ है, जो अपने आप में एक गंभीर अपराध है।

कई स्तरों पर हुए अपराध

प्रियंक कानूनगो ने मामले की जटिलता को समझाते हुए कहा, "इस बात को समझना होगा कि अगर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री बनी है तो निश्चित तौर पर बच्चों का यौन शोषण हुआ है। यह एक अपराध है। दूसरा अपराध बच्चों का यौन शोषण और उनका वीडियो बनाना है। उस वीडियो को ऑनलाइन शेयर करना तीसरा अपराध है। इसी तरह उस सामग्री को बेचने के लिए विज्ञापन चलाना एक अलग अपराध है।"

उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस को नोटिस इसलिए भेजा गया क्योंकि शिकायतकर्ता संगठन दिल्ली में स्थित है, जिससे जांच में आसानी हो। पुलिस को यह पता लगाने का निर्देश दिया गया है कि पीड़ित बच्चे देश के किस हिस्से से हैं। दिल्ली पुलिस ने आयोग को सूचित किया है कि उसने इस संबंध में मेटा और बीबीसी को नोटिस भेज दिया है और कार्रवाई जारी है।

मेटा की भूमिका पर गंभीर सवाल

कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा की भूमिका पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता के अनुसार, मेटा अब सिर्फ एक 'मध्यस्थ' (Intermediary) प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है। शिकायतकर्ता द्वारा दिए गए स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि मेटा अब यूजर्स को यह भी बता रहा है कि किस तरह का वीडियो डालने पर पैसे मिलेंगे, वीडियो कब अपलोड करना है, उसका कैप्शन क्या होना चाहिए और उसे एडिट करने की सुविधा भी दे रहा है।

उन्होंने कहा, "इस सब के कारण मेटा अपनी इंटरमीडियटरी प्लेटफॉर्म्स की भूमिका से बाहर आ जाता है। वह कंटेंट क्यूरेट करने वाला प्लेटफॉर्म बन जाता है।" कानूनगो के मुताबिक, ऐसी स्थिति में मेटा को आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिला 'सेफ हार्बर' का संरक्षण खत्म हो जाता है। यह संरक्षण प्लेटफॉर्म को यूजर द्वारा पोस्ट की गई सामग्री की जिम्मेदारी से बचाता है।

मंत्रालयों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न

प्रियंक कानूनगो ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मेटा को सिर्फ नोटिस जारी करने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "अगर कोई अपराध हुआ है तो जांच होगी, नोटिस नहीं भेजा जाएगा। अगर हम किसी बलात्कारी को नोटिस भेजकर पूछें तो यह तरीका नहीं है।" इसके अलावा, MeitY से भी यह पूछा गया है कि क्या उसके किसी अधिकारी ने इस मामले की जानकारी पुलिस को देने में कोई लापरवाही बरती है, क्योंकि दिल्ली पुलिस को मंत्रालय से कोई सूचना नहीं मिली थी।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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