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RBI की नीतियों से FY27 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मज़बूत, $75 अरब तक अधिशेष का अनुमान: रिपोर्ट

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों का असर अब अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों की बदौलत वित्त वर्ष 2027 तक भार…

RBI की नीतियों से FY27 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मज़बूत, $75 अरब तक अधिशेष का अनुमान: रिपोर्ट
(फोटो: IANS)

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी मुद्रा प्रवाह को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों का असर अब अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इन उपायों की बदौलत वित्त वर्ष 2027 तक भारत का भुगतान संतुलन (Balance of Payments) 65 से 75 अरब डॉलर के अधिशेष (Surplus) में रह सकता है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली बैंक ऑफ़ बड़ौदा की इस रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि देश की बाहरी आर्थिक स्थिति अब किसी भी वैश्विक झटके का सामना करने के लिए पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है।

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रिपोर्ट का मानना है कि भले ही मध्य पूर्व में अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था का भविष्य अच्छा दिख रहा है। यह मज़बूती सरकार और आरबीआई द्वारा उस समय शुरू किए गए उपायों का नतीजा है, जब यूएस-ईरान युद्ध, तेल की बढ़ती कीमतों और लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की निकासी के कारण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया था। इन वजहों से डॉलर के मुकाबले रुपये पर भी भारी दबाव देखा जा रहा था।

विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के उपाय

इन चुनौतियों से निपटने के लिए RBI ने डॉलर आकर्षित करने के लिए कई योजनाएं शुरू कीं, जिनके तहत कुल 136.4 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह (inflow) हुआ। इस विशाल राशि का 90 प्रतिशत से भी ज़्यादा हिस्सा यानी लगभग 127.2 अरब डॉलर, विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी FCNR(B) जमा योजनाओं के ज़रिए आया। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा में विदेशी कर्ज (OFCB) के माध्यम से 5.3 अरब डॉलर और बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) के ज़रिए 3.9 अरब डॉलर जुटाए गए।

FCNR(B) योजनाओं की सफलता के पीछे एक बड़ी वजह ब्याज दरों में बढ़ोतरी थी। कई बैंकों ने 3 से 5 साल की जमा राशि पर ब्याज दरें 2-4% से बढ़ाकर 6-7% कर दीं, जिससे ये प्रवासी भारतीयों (NRIs) के लिए बेहद आकर्षक बन गईं।

रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी मुद्रा भंडार

इस भारी विदेशी मुद्रा प्रवाह ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत किया और रुपये को गिरने से रोकने में भी मदद की। भारत की विदेशी मुद्रा संपत्ति में 47.9 अरब डॉलर की वृद्धि हुई, जिससे देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 729.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया।

रिपोर्ट में सेवा निर्यात (Service Exports) और विदेशों से आने वाले धन (Remittances) में मज़बूती का भी ज़िक्र है। इसके चलते अनुमान है कि चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 1 से 1.25 प्रतिशत के बीच सीमित रह सकता है। साथ ही, रिपोर्ट बताती है कि आरबीआई अतिरिक्त नकदी को बाज़ार से वापस खींच रहा है, जिसके लिए उसने 6 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कुल 53.5 लाख करोड़ रुपये की VRRR नीलामी की घोषणा की है।

इनपुट: IANS

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