GDP के 7.8% ग्रोथ पर राजनीतिक बहस: विपक्ष ने आंकड़ों को 'हेराफेरी' बताया, सरकार ने विकास गिनाया
वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन इन आंकड़ों पर अब एक राजनीतिक बहस छिड़ गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ एक ओर विपक्ष इसे…
वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, लेकिन इन आंकड़ों पर अब एक राजनीतिक बहस छिड़ गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, जहाँ एक ओर विपक्ष इसे आंकड़ों की बाजीगरी बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इस वृद्धि को जमीनी विकास का प्रमाण मान रहा है।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, "प्रधानमंत्री यह आर्थिक वृद्धि की बात किसी निम्न या गरीब वर्ग के बीच जाकर कहें, तब इस वृद्धि की हकीकत सामने आएगी।" उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39 का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री को इन आंकड़ों का मूल्यांकन उसके आलोक में करने की सलाह दी।
विपक्ष के आरोप और सरकार का जवाब
विपक्ष ने इन आंकड़ों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। CPI(M) के महासचिव एम. ए. बेबी ने आरोप लगाया कि यह ग्रोथ रेट 'आंकड़ों में हेरफेर का नतीजा' है। उन्होंने कहा, "देखिए, जीडीपी ग्रोथ रेट का जो अनुमान लगाया जा रहा है, उसकी असलियत खुद पूर्व फाइनेंस सेक्रेटरी ने सामने रखी है। अर्थशास्त्री भी इस पर अपनी बात रख रहे हैं। रघुराम राजन जैसे लोगों ने सामने आकर आंकड़ों में हेरफेर की पोल खोली है।" उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी आने वाले दिनों में इस पर और जानकारी सामने लाएगी और पोलित ब्यूरो की बैठक के बाद अपना आधिकारिक दृष्टिकोण स्पष्ट करेगी।
विपक्ष के इन आरोपों पर बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने पलटवार किया। उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा, "उनसे कहिए कि वे 2005 से पहले के बिहार और 2005 के बाद के बिहार की तुलना करें।" उन्होंने दावा किया कि पहले गांवों में सड़क, स्कूल, बिजली, पानी या अस्पताल जैसी कोई बुनियादी सुविधा नहीं थी, लेकिन आज स्थिति बदल चुकी है और बिहार के गांव शहर जैसे विकसित हो गए हैं।
इनपुट: IANS



