RBI की मौद्रिक नीति बैठक: ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं, जीडीपी वृद्धि 7% से ऊपर रहने का अनुमान
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) इस हफ्ते होने वाली अपनी बैठक में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रख सकती है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही महंगाई अगले दो…
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) इस हफ्ते होने वाली अपनी बैठक में रेपो रेट को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रख सकती है। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही महंगाई अगले दो तिमाहियों तक 5% से ऊपर बनी रह सकती है, लेकिन अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार को देखते हुए ब्याज दरों में किसी भी तरह के बदलाव की संभावना कम है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी इस रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7% से अधिक रहने का अनुमान लगाया गया है।
आरबीआई की एमपीसी की यह अहम बैठक 3 से 5 अगस्त के बीच होगी और इसके फैसलों का ऐलान 5 अगस्त को किया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में, केंद्रीय बैंक के लिए दरों को स्थिर रखना ही सबसे उपयुक्त कदम होगा।
अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत
एसबीआई रिसर्च ने अपनी रिपोर्ट में कई सकारात्मक आर्थिक संकेतकों का उल्लेख किया है। जुलाई महीने में देश में 35 अरब डॉलर का मजबूत पूंजी प्रवाह (कैपिटल इनफ्लो) देखा गया, जिससे 24 जुलाई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.5 अरब डॉलर बढ़ गया। इसके साथ ही, फॉरवर्ड बाजार में भी दबाव कम हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछली तीन मौद्रिक नीतियों में आरबीआई ने पश्चिम एशिया संकट के चलते वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया था। हालांकि, अब हालात सुधरने के साथ वास्तविक वृद्धि दर 7% से भी बेहतर रहने की उम्मीद है।
वैश्विक अनिश्चितता और AI का जोखिम
रिपोर्ट में वैश्विक चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है। पश्चिम एशिया में जारी संकट और विभिन्न देशों में अलग-अलग आर्थिक रुझानों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी हुई है। यहां तक कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भी अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान उम्मीद से ज्यादा सुस्ती दर्ज की गई। इन वैश्विक कारकों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए आरबीआई द्वारा बहुत नरम रुख अपनाने की संभावना नहीं है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक चेतावनी भी दी गई है। इसमें कहा गया है कि एआई क्षेत्र में भारी निवेश और बढ़ती उम्मीदों के बीच एक सट्टा गतिविधि भी चल रही है। इससे एक "एआई बबल" बनने का खतरा पैदा हो सकता है, क्योंकि कई कंपनियां फिलहाल जरूरत से ज्यादा निवेश कर रही हैं।
मानसून और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मानसून की स्थिति काफी हद तक संतोषजनक बताई गई है। जुलाई में सामान्य से अधिक बारिश होने से देशभर में वर्षा की कुल कमी घटकर 13% रह गई है। जलाशयों का जलस्तर भी लगभग सामान्य है और खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल की तुलना में केवल 4.7% कम है, जिससे ग्रामीण मांग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इनपुट: IANS



