राजस्थान: वरिष्ठ RAS अधिकारी पंकज ओझा को फेसबुक पोस्ट पर चार्जशीट, अधिकारी ने कहा- 'मैं खुद पीड़ित हूं'
राजस्थान सरकार ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारी पंकज ओझा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ओझा पर अक्टूबर 2025 में अपने फेसबुक अकाउंट से…
राजस्थान सरकार ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक सेवा (RAS) अधिकारी पंकज ओझा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ओझा पर अक्टूबर 2025 में अपने फेसबुक अकाउंट से कथित तौर पर जातिगत, सांप्रदायिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील पोस्ट साझा करने का आरोप है, जिसके चलते उन्हें आरोप पत्र जारी किया गया है।
कार्मिक विभाग ने पंकज ओझा को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिला तो एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है। वर्तमान में ओझा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में अतिरिक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।
क्या हैं मुख्य आरोप?
चार्जशीट के अनुसार, 'आरएएस पंकज ओझा' नाम के फेसबुक अकाउंट से 16, 19, 21, 22, 23, 24, 25 और 27 अक्टूबर 2025 को कई आपत्तिजनक पोस्ट किए गए थे। उस समय वह गोपालन विभाग के निदेशक थे। आरोपों में प्रधानमंत्री और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का भी जिक्र है। एक कथित पोस्ट में केंद्र सरकार की जाति आधारित जनगणना नीति पर भी सवाल उठाया गया था, जिसमें लिखा था, "सिर्फ जाति आधारित जनगणना ही क्यों? जाति आधारित करदाताओं और जाति आधारित अपराधों का आंकड़ा भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि पता चल सके कि कौन कितना योगदान देता है।" विभाग ने इसे सरकारी नीति की आलोचना और सेवा नियमों का उल्लंघन माना है।
अधिकारी का पक्ष: 'फर्जी स्क्रीनशॉट फैलाए गए'
वहीं, पंकज ओझा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका दावा है कि उन्होंने कोई भी आपत्तिजनक पोस्ट नहीं की और उनके नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए। उन्होंने कहा, "मैं खुद इस मामले का पीड़ित हूं।"
ओझा के अनुसार, उन्होंने इस संबंध में 29 दिसंबर 2025 को मुख्य सचिव और कार्मिक सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने बताया कि जयपुर के अशोक नगर थाने में इस मामले की शिकायत भी दर्ज है, जिसकी जांच चल रही है। ओझा ने यह भी दावा किया कि उन्होंने 27 जनवरी 2026 को सरकार के 'राजकाज' पोर्टल के माध्यम से अपना विस्तृत जवाब दाखिल कर दिया था, जिसकी रसीद उनके पास मौजूद है।
कैसे आगे बढ़ा मामला?
कार्मिक विभाग के मुताबिक, अधिकारी द्वारा जातीय और सांप्रदायिक टिप्पणियां करने की शिकायत मिलने के बाद उनसे 19 जनवरी 2026 को तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। विभाग का कहना है कि इस तरह की पोस्ट सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकती हैं और यह राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 के नियम 3, 4 और 11 का उल्लंघन है, जिससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा है।
इनपुट: IANS



