मंगलवार, 7 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

हेट स्पीच मामला: वॉयस सैंपल देने में अभिषेक बनर्जी की हिचक पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल के एक कथित हेट स्पीच मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच में सहयोग के लिए अपना वॉयस सैंपल (आवाज का नमूना) देने म

हेट स्पीच मामला: वॉयस सैंपल देने में अभिषेक बनर्जी की हिचक पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने उठाए सवाल
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल के एक कथित हेट स्पीच मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच में सहयोग के लिए अपना वॉयस सैंपल (आवाज का नमूना) देने में उनकी अनिच्छा पर सवाल उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अदालत ने पूछा कि जब उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है, तो वे जांच में सहयोग क्यों नहीं कर रहे हैं।

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यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान एक रैली में दिए गए भाषण से जुड़ा है। आरोप है कि डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी ने हिंसा भड़काने वाले बयान दिए थे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को धमकी भी दी थी। राज्य की CID (आपराधिक जांच विभाग) इस मामले की जांच कर रही है।

जांच और कानूनी प्रक्रिया

जांच के तहत, CID ने चुनावी वीडियो में मौजूद भाषण की पुष्टि के लिए अभिषेक बनर्जी से उनकी आवाज़ का नमूना मांगा था। इसी सिलसिले में उत्तर 24 परगना जिले की बिधाननगर जिला अदालत ने उन्हें न्यायिक मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में सैंपल देने का आदेश दिया था।

इस आदेश से राहत पाने के लिए बनर्जी के वकील ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच के सामने याचिका दायर कर तत्काल सुनवाई की मांग की। हालांकि, जस्टिस भट्टाचार्य ने तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। उन्होंने याद दिलाया कि बनर्जी को 31 जुलाई तक किसी भी कठोर पुलिस कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है और ऐसे में उन्हें जांच में सहयोग करना चाहिए।

दोनों पक्षों की दलीलें

अदालत में अभिषेक बनर्जी के वकील ने दलील दी कि वॉयस सैंपल की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि सांसद पहले ही यह मान चुके हैं कि कैंपेन वीडियो में उन्हीं की आवाज़ है। वहीं, राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि बनर्जी का सैंपल देने से इनकार करना जांच में असहयोग को दर्शाता है।

राज्य के वकील ने तर्क दिया कि रिकॉर्ड की गई आवाज़ की प्रामाणिकता साबित करने और जांच पूरी करने के लिए फोरेंसिक जांच ज़रूरी है। सरकार ने यह भी याद दिलाया कि बनर्जी को दी गई अंतरिम सुरक्षा की एक मुख्य शर्त जांच एजेंसी के साथ पूरा सहयोग करना था।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से कहा कि अभिषेक बनर्जी को जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करते हुए बिना देरी के अपना वॉयस सैंपल देना चाहिए। कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 10 जुलाई तय की है।

इनपुट: IANS

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