शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस: सीबीआई की धीमी जाँच पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने जताई नाराज़गी, तेज़ी लाने का निर्देश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज परिसर में हुए दुष्कर्म और हत्या मामले की नई जाँच में हो रही देरी पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रति अपनी नाराज़गी व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS के…

आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस: सीबीआई की धीमी जाँच पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने जताई नाराज़गी, तेज़ी लाने का निर्देश
(फोटो: IANS)

कलकत्ता हाई कोर्ट ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज परिसर में हुए दुष्कर्म और हत्या मामले की नई जाँच में हो रही देरी पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के प्रति अपनी नाराज़गी व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने एजेंसी को जाँच में तेज़ी लाने और अगली सुनवाई तक ठोस प्रगति दिखाने का स्पष्ट निर्देश दिया है।

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न्यायमूर्ति शम्पा सरकार और न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की खंडपीठ ने सीबीआई द्वारा प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट और जाँच पूरी करने के लिए और समय मांगने पर यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि वह 28 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में इस मामले में कुछ ठोस और सकारात्मक प्रगति देखना चाहती है।

जाँच पर पुराना साया, अदालत की फटकार

अदालत ने इस बात पर असंतोष जताया कि सीबीआई की नई टीम द्वारा की जा रही जाँच एजेंसी की पिछली टीम की जाँच से प्रभावित दिख रही है। पीठ ने कहा कि पुरानी जाँच को पूरी तरह से भूलकर मामले को नए सिरे से देखने की ज़रूरत है। न्यायमूर्ति सरकार ने टिप्पणी की, "पिछली जांच को भूल जाइए। उस पिछली जांच को एक तरफ रख दीजिए और मामले को नए सिरे से देखिए। पिछली जांच से प्रभावित होकर कोई नई जांच न कीजिए।"

अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई की नई टीम को बार-बार अपराध से जुड़े सभी बिंदुओं की फिर से जाँच करने के लिए कहा गया था, लेकिन इस सलाह पर ज़्यादा कुछ नहीं किया गया।

क्या है यह पूरा मामला?

यह मामला अगस्त 2024 का है, जब कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के परिसर में एक महिला जूनियर डॉक्टर के साथ जघन्य दुष्कर्म और हत्या की गई थी। शुरुआत में कोलकाता पुलिस ने मामले की जाँच की और एकमात्र आरोपी, नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। रॉय को बाद में दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई।

हालांकि, पीड़िता का परिवार सीबीआई की जाँच से संतुष्ट नहीं था, जिसके बाद उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। दरअसल, सीबीआई की पिछली जाँच टीम पर कोलकाता पुलिस की जाँच को ही जस का तस स्वीकार कर लेने के आरोप लगे थे। इन्हीं आरोपों और परिवार की याचिका के बाद अदालत ने केंद्रीय एजेंसी को इस मामले में नए सिरे से जाँच करने का आदेश दिया था।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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