कोलकाता में 27 अवैध इमारतों का खुलासा, सीएम सुवेंदु अधिकारी ने दी लाइव पूछताछ की चेतावनी
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 27 इमारतों के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इन अवैध निर्माणों के लिए…
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 27 इमारतों के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इन अवैध निर्माणों के लिए जिम्मेदार प्रमोटरों और सरकारी अधिकारियों से मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से पूछताछ की जाएगी। यह जानकारी समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट में सामने आई है।
नगर मामलों और शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने गुरुवार को कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद यह खुलासा किया। उन्होंने बताया कि ऑडिट के दौरान कुल 193 रुकी हुई परियोजनाओं को दोबारा काम शुरू करने की मंजूरी दे दी गई, लेकिन 27 इमारतों में बड़ी गड़बड़ियां पाई गईं।
सबके सामने होगी जवाबदेही
मंत्री पॉल के अनुसार, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अवैध निर्माण के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री ने आदेश दिया है कि एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा और मीडिया को भी बुलाया जाएगा। अवैध निर्माण के आरोपी लोगों को वहां पेश किया जाएगा। उन्हें सबके सामने जवाबदेह ठहराया जाएगा।" इस कार्रवाई के दायरे में सिर्फ प्रमोटर ही नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी करने वाले सरकारी अधिकारी भी शामिल होंगे।
अवैध निर्माण पर सरकार का कड़ा रुख
अग्निमित्रा पॉल ने जोर देकर कहा कि सरकार रियल एस्टेट बिल्डरों को नुकसान पहुंचाना नहीं चाहती, लेकिन अवैध निर्माण के कारण तारातला जैसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होने देगी। जांच में पाया गया कि कोलकाता और बरानगर जैसे कई इलाकों में चार मंजिला इमारत की मंजूरी लेकर सात मंजिल तक बना दिए गए। ऐसे 27 ऑपरेटरों को नोटिस पहले ही भेजे जा चुके हैं।
निगरानी के लिए विशेष समितियां
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने निर्माण प्रक्रिया को सख्त बनाने का फैसला किया है। अब किसी भी निर्माण के लिए मिट्टी परीक्षण, स्ट्रक्चरल ऑडिट और योजना का सत्यापन अनिवार्य होगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसके अलावा, पीडब्ल्यूडी सचिव अंतरा आचार्य की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच समिति भी पहले ही बनाई जा चुकी है।
इनपुट: IANS



