गुरूवार, 9 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल

कोलकाता स्वर्ण व्यवसायी हत्याकांड: फोरेंसिक टीम ने संदिग्ध क्राइम सीन से जुटाए नए सबूत

कोलकाता के स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिलिया की पिछले साल हुई हत्या के मामले में जांच ने एक बार फिर रफ़्तार पकड़ ली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम ने कोलकाता

कोलकाता स्वर्ण व्यवसायी हत्याकांड: फोरेंसिक टीम ने संदिग्ध क्राइम सीन से जुटाए नए सबूत
(फोटो: IANS)

कोलकाता के स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिलिया की पिछले साल हुई हत्या के मामले में जांच ने एक बार फिर रफ़्तार पकड़ ली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम ने कोलकाता के पास न्यू टाउन स्थित एक घर की नए सिरे से जांच की है, जहाँ इस अपराध को अंजाम दिए जाने का संदेह है। जांचकर्ताओं ने इस संभावित अपराध स्थल से नए नमूने एकत्र किए हैं ताकि मामले की गुत्थी सुलझाई जा सके।

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बिधाननगर पुलिस इस हत्याकांड की जांच के लिए पहले ही एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर चुकी है। गुरुवार को बिधाननगर पुलिस, पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF), साइबर क्राइम और फोरेंसिक की संयुक्त टीमों ने इस संदिग्ध घर का दौरा किया।

क्या है पूरा मामला?

स्वपन कामिलिया का शव पिछले साल 29 अक्टूबर को न्यू टाउन के जत्रागाछी खालपार इलाके से बरामद हुआ था। इसके दो दिन बाद, उनके परिवार ने अपहरण, चोरी और हत्या का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। परिवार का आरोप है कि 28 अक्टूबर को पांच से छह लोग दो गाड़ियों में दत्तबाद स्थित उनकी सोने की दुकान पर आए और कथित तौर पर कामिलिया को जबरन न्यू टाउन के उस घर में ले गए। दत्तबाद के गोविंद बाग स्थित मकान के मालिक और अशोक कर नामक एक कर्मचारी ने भी कामिलिया को वहां ले जाते हुए देखने का दावा किया था।

पूर्व BDO है मुख्य आरोपी

पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया था कि कामिलिया के साथ बुरी तरह मारपीट की गई थी। इस मामले में राजगंज के पूर्व ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) प्रशांत बर्मन को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन बर्मन कथित तौर पर फरार है।

आरोपी का कानूनी रिकॉर्ड: बर्मन को जिला अदालत से अग्रिम जमानत मिल गई थी, लेकिन बिधाननगर पुलिस ने इसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय और बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने उसे आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया, लेकिन उसने इसका पालन नहीं किया। इसके बाद राज्य सरकार ने उसे बीडीओ के पद से हटा दिया। बर्मन को बाद में एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया था और जमानत भी मिल गई थी। इसी साल मई में उसे नशे में गाड़ी चलाने और एक व्यक्ति को टक्कर मारने के आरोप में फिर गिरफ्तार किया गया, लेकिन उसे बारासात की अदालत से जमानत मिल गई थी।

इनपुट: IANS

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