कोलकाता में फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश, 5G टावर और सस्ते लोन का झांसा देकर करते थे ठगी, 67 गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल की पुलिस ने कोलकाता में एक बड़े धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो दो फर्जी कॉल सेंटरों के जरिए देश भर में लोगों को अपना निशाना बना रहा था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक…
पश्चिम बंगाल की पुलिस ने कोलकाता में एक बड़े धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया है, जो दो फर्जी कॉल सेंटरों के जरिए देश भर में लोगों को अपना निशाना बना रहा था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में कुल 67 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 41 महिलाएं भी शामिल हैं। ये लोग टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों और बीमा फर्मों के प्रतिनिधि बनकर लोगों को लुभावने झांसे देते थे।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लोगों को 5जी मोबाइल टावर लगवाने, ज़्यादा मुनाफे वाली बीमा योजनाओं, स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों और कम ब्याज पर लोन दिलाने का लालच देता था। पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए ये लोग बैंकों, संगठनों और सरकारी एजेंसियों के जाली ऑथराइजेशन लेटर तक का इस्तेमाल करते थे। एक बार जब कोई इनके जाल में फंस जाता, तो उसे प्रोसेसिंग फीस या अन्य शुल्कों के नाम पर कुछ बैंक खातों में पैसे जमा करने के लिए कहा जाता था।
छापेमारी और हैरान करने वाली बरामदगी
यह कार्रवाई दक्षिण कोलकाता के कस्बा इलाके में स्थित राजडांगा मेन रोड पर की गई। एक गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने बुधवार (2 सितंबर) को पहली छापेमारी की। तलाशी के दौरान अधिकारियों को 39 मोबाइल फोन, नौ डायरी, दो एटीएम डेबिट कार्ड और 16,000 रुपये नकद मिले। जांचकर्ताओं ने बताया कि बरामद डायरियों में न केवल संभावित लक्ष्यों की सूची थी, बल्कि लोगों को पैसे देने के लिए मनाने वाली पूरी बातचीत की स्क्रिप्ट भी लिखी हुई थी।
एक ठिकाने से दूसरे का सुराग मिला
पहले छापे में गिरफ्तार हुए लोगों से पूछताछ के दौरान पुलिस को उसी सड़क पर पास की एक इमारत में चल रहे एक और फर्जी कॉल सेंटर की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने तुरंत दूसरी जगह पर भी छापा मारा, जहाँ से 18 महिलाओं समेत 27 और लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दूसरे ठिकाने से 32 मोबाइल फोन और चार रजिस्टर भी जब्त किए गए। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह कॉल सेंटर करीब एक महीने पहले ही पटुली इलाके से राजडांगा मेन रोड पर शिफ्ट हुआ था।
मास्टरमाइंड की तलाश और जांच जारी
शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन दोनों कॉल सेंटरों को नयाबाद निवासी संदीप बनर्जी और उसके कुछ साथी मिलकर चला रहे थे। पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह ने पिछले छह महीनों में धोखाधड़ी के पैसे के लेन-देन के लिए करीब 100 बैंक खातों का इस्तेमाल किया, जिन्हें 'म्यूल अकाउंट' भी कहा जाता है। सभी 67 आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और ठगी गई कुल रकम का पता लगाने में जुटी है।
इनपुट: IANS



