शनिवार, 5 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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पश्चिम बंगाल: निकाय चुनावों के लिए CPM की नई रणनीति, जिला कमेटियों को मिली उम्मीदवार चुनने की कमान

पश्चिम बंगाल में इस साल के अंत में होने वाले शहरी निकाय चुनावों के लिए राज्य की प्रमुख वामपंथी पार्टी CPI(M) ने अपनी चुनावी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक…

पश्चिम बंगाल: निकाय चुनावों के लिए CPM की नई रणनीति, जिला कमेटियों को मिली उम्मीदवार चुनने की कमान
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में इस साल के अंत में होने वाले शहरी निकाय चुनावों के लिए राज्य की प्रमुख वामपंथी पार्टी CPI(M) ने अपनी चुनावी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी अब उम्मीदवार चयन और सीट-बंटवारे की प्रक्रिया को पहले से ज़्यादा विकेंद्रीकृत कर रही है। इस नई नीति के तहत, अब राज्य समिति की जगह जिला समितियों को ज़्यादा अधिकार दिए गए हैं।

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फैसले के अनुसार, नगर निगम और नगरपालिकाओं के चुनावों के लिए लेफ्ट फ्रंट के सहयोगियों के बीच सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला अब जिला समितियां ही तय करेंगी। इसके अलावा, उम्मीदवारों के चयन का अंतिम अधिकार भी उन्हीं के पास होगा, जिसमें राज्य नेतृत्व का सीधा हस्तक्षेप नहीं होगा।

गठबंधन पर पार्टी का सख़्त रुख

हालांकि, पार्टी ने गठबंधन को लेकर कुछ सीमाएं भी तय की हैं। CPI(M) की केंद्रीय समिति के एक सदस्य ने स्पष्ट किया कि अगर किसी जिला समिति को लेफ्ट फ्रंट के बाहर किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ गठबंधन की ज़रूरत महसूस होती है, तो उसे पहले राज्य समिति से मंज़ूरी लेनी होगी।

इसके साथ ही, पार्टी नेतृत्व ने तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट के साथ किसी भी तरह के समझौते पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। केंद्रीय समिति के नेता ने ज़ोर देकर कहा, "हमें इनमें से कुछ गुटों से जिला स्तर पर सीट-शेयरिंग के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन हमारा जवाब साफ़ तौर पर 'नहीं' है।" पार्टी ने जिन तीन गुटों से दूरी बनाने का फैसला किया है, उनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का गुट, निकाले गए विधायक रिताब्रता बनर्जी का गुट और NCP(I) में शामिल हुए 20 लोकसभा सांसदों का समूह शामिल है।

लक्ष्य और कांग्रेस पर स्थिति

पार्टी का मुख्य उद्देश्य राज्य में प्रमुख विपक्षी दल का दर्जा फिर से हासिल करना है और आगामी शहरी निकाय चुनावों को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। केंद्रीय समिति के सदस्य के अनुसार, "हम किसी ऐसी ताकत के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं करेंगे जिसे राज्य की जनता ने पूरी तरह से नकार दिया हो और जो आपसी गुटबाजी के कारण अपनी विश्वसनीयता खो चुकी हो।"

वहीं, कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना भी लगभग खत्म हो चुकी है। राज्य सचिवालय के एक सदस्य ने बताया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने एकतरफा तरीके से लेफ्ट फ्रंट के साथ चुनावी गठबंधन तोड़ दिया था। उन्होंने कहा, "इसलिए, आने वाले शहरी निकाय चुनावों में उस गठबंधन को फिर से बहाल करने की कोई संभावना नहीं है। बेहतर यही है कि हम लेफ्ट फ्रंट के तौर पर अकेले चुनाव लड़ें, ताकि हमें पता चल सके कि हमारी स्थिति क्या है।"

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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