PoK: रावलकोट में विरोध प्रदर्शनों पर सैन्य कार्रवाई के बाद तनाव, आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का रावलकोट शहर पिछले कई महीनों से भारी तनाव का केंद्र बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिजली और ज़रूरी चीज़ों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शुरू…
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का रावलकोट शहर पिछले कई महीनों से भारी तनाव का केंद्र बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बिजली और ज़रूरी चीज़ों की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी सेना की हिंसक कार्रवाई के बाद से हालात बेहद गंभीर हैं। इस कार्रवाई में कई आम नागरिकों की जान चली गई, जिन्हें स्थानीय लोग अब 'शहीद' के रूप में याद कर रहे हैं।
स्थानीय लोग इन प्रदर्शनों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। उनकी याद में बने स्मारकों पर लाल गुलाब रखे जा रहे हैं और सम्मान में दुकानें भी बंद रखी जा रही हैं। ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन (एबीसी) ने जब इस शहर का दौरा किया, तो पाया कि सरकार की इस कार्रवाई से लोगों में गहरा अविश्वास और गुस्सा है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई आपबीती
रावलकोट के एक निवासी हाजी हसन अजीजी ने एबीसी को बताया कि करीब तीन हफ्ते पहले उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को निहत्थे लोगों पर बड़ी बंदूकों से अंधाधुंध गोलियां चलाते देखा था। उन्होंने एक स्थान की ओर इशारा करते हुए कहा, "हमने शव उठाए; उन्हें एम्बुलेंस में रखा और कुछ को अपने कंधों पर उठाया। यह वह जगह है जहां एक लड़का शहीद हुआ था। उसका नाम नोमान था।"
एक अन्य स्थानीय नागरिक मुमताज खान के अनुसार, पुलिस ने पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया और फिर इतनी गोलियां चलाईं कि उनके घर की दीवारों तक में छेद हो गए। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि अस्पताल बंद होने के कारण कई घायलों को इलाज के लिए घरों में ले जाना पड़ा। हसन ने कहा, "हमने उनके जख्मों को अपने स्कार्फ से ढक दिया। हमें सिर्फ ये लगा कि वे आंसू गैस का इस्तेमाल करेंगे। हमारे हाथों में डंडे और पत्थर थे।"
प्रशासन की सख्त पाबंदियां
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन ने इलाके में ज़रूरी सामानों की डिलीवरी रोक दी है, जिससे लोगों को खाने-पीने की चीजें खरीदने में भी मुश्किल हो रही है। इसके अलावा, कुछ इलाकों में बिजली भी काट दी गई है। एबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं पर भी रोक लगा दी गई, जिससे स्थानीय पत्रकारों के लिए भी जानकारी जुटाना मुश्किल हो गया।
अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग
विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों और मीडिया से पीओके के हालात पर नज़र रखने की अपील की है। हाल ही में जेएएसी ने एक वीडियो जारी किया जिसमें सुरक्षा बलों की फायरिंग में घायल एक व्यक्ति को दिखाया गया था।
हालांकि पाकिस्तानी सरकार ने पाबंदियों के चलते हताहतों का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने दावा किया है कि इस हिंसा में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। बिजली और महंगाई के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब राजनीतिक सुधार और एक जवाबदेह सरकार की मांग में बदल चुका है।
इनपुट: IANS



