बांग्लादेश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर मानवाधिकार संगठन की चिंता, सात महीनों में 1600 से ज़्यादा मामले
बांग्लादेश में इस साल के पहले सात महीनों में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के 1,660 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं। यह चिंताजनक आँकड़ा एक प्रमुख महिला अधिकार संगठन 'बांग्लादेश मोहिला परिषद' ने…
बांग्लादेश में इस साल के पहले सात महीनों में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के 1,660 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं। यह चिंताजनक आँकड़ा एक प्रमुख महिला अधिकार संगठन 'बांग्लादेश मोहिला परिषद' ने जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने इन आँकड़ों को देश में महिलाओं और बच्चों के लिए बिगड़ते सुरक्षा हालात का सबूत बताया है।
ढाका के नेशनल प्रेस क्लब के बाहर आयोजित एक मानव श्रृंखला विरोध प्रदर्शन के दौरान ये तथ्य सामने रखे गए। संगठन का उद्देश्य देशभर में लगातार हो रही हिंसा, बलात्कार और हत्या जैसी घटनाओं के खिलाफ आवाज़ उठाना था। परिषद के मुताबिक, जनवरी से जुलाई के बीच कम से कम 1,667 महिलाएँ और लड़कियाँ विभिन्न प्रकार के अपराधों का शिकार हुईं।
चिंताजनक आँकड़े और अधूरी तस्वीर
परिषद की अध्यक्ष फौजिया मुस्लिम ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि इन सात महीनों में 83 लड़कियों और 258 महिलाओं की हत्या कर दी गई। इसके अलावा, बलात्कार के बाद हत्या के 31 मामले भी दर्ज किए गए। उन्होंने चेतावनी दी कि ये आँकड़े हिंसा की पूरी भयावहता को नहीं दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, “हमें जो जानकारी मिल रही है, वह ज़्यादातर कुछ ही अखबारों की रिपोर्ट से इकट्ठा की गई है। ये रिपोर्ट सिर्फ 14 अखबारों के डेटा पर आधारित हैं... अगर हमें सभी मीडिया से डेटा मिला होता, तो महिलाओं के खिलाफ हिंसा की असली तस्वीर कहीं ज़्यादा डरावनी हो सकती थी।”
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
बांग्लादेश के मीडिया आउटलेट यूएनबी के अनुसार, परिषद की महासचिव मालेका बानो ने बताया कि कुल 1,667 पीड़ितों में 292 महिलाएँ और लड़कियाँ बलात्कार का शिकार हुईं। उन्होंने कहा, “इन घटनाओं से स्पष्ट हो गया है कि बांग्लादेश में महिलाएँ और बच्चे आज कहीं भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि हम हिंसा की इस प्रवृत्ति को कम करने में विफल हो रहे हैं।”
आयोजन में मौजूद लोगों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि बांग्लादेश बलात्कार और दुर्व्यवहार के लिए एक 'सुरक्षित पनाहगाह' बनता जा रहा है। मालेका बानो ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि छोटी बच्चियाँ, जो शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व भी नहीं हैं, वे भी यौन हिंसा का शिकार हो रही हैं। संगठन ने इन अपराधों को रोकने के लिए एक व्यापक सामाजिक आंदोलन, कानूनों के सख्त कार्यान्वयन और प्रभावी निगरानी की माँग की है।
इनपुट: IANS



