भारत-यूरेशियाई आर्थिक संघ के बीच व्यापार समझौता जल्द? पीयूष गोयल और समकक्ष मंत्री की अहम बैठक
भारत अपने व्यापारिक रिश्तों को विस्तार देने और निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिशें तेज़ कर रहा है। इसी सिलसिले में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन के व्यापार…
भारत अपने व्यापारिक रिश्तों को विस्तार देने और निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिशें तेज़ कर रहा है। इसी सिलसिले में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन के व्यापार मंत्री आंद्रेई स्लेपनेव के साथ एक अहम बैठक की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चल रही बातचीत को गति देना था।
शुक्रवार को हुई इस बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा की। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “भारत-यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) एफटीए वार्ता को तेज करने, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और बाजार पहुंच का विस्तार करने के तरीकों पर चर्चा की।”
समझौते के केंद्र में कौन से क्षेत्र?
इस बातचीत में कुछ प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें फार्मास्यूटिकल्स, प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाइल शामिल हैं। पीयूष गोयल ने बताया कि बैठक में दोनों पक्षों के बीच आर्थिक सहयोग को और गहरा करने तथा व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने के अवसरों पर भी विचार किया गया।
यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) में आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और रूस सदस्य देश हैं। भारत इस समूह के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर लंबे समय से बातचीत कर रहा है, ताकि व्यापार और बाज़ार तक पहुंच को आसान बनाया जा सके।
भारत के बढ़ते व्यापारिक कदम
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत दुनिया के अन्य आर्थिक गुटों के साथ भी अपने व्यापारिक समझौतों को अंतिम रूप देने में जुटा है। हाल ही में पीयूष गोयल ने बताया था कि यूरोपीय संघ (EU) के सभी 27 सदस्य देश भारत के साथ FTA का समर्थन करते हैं और इसे जल्द से जल्द लागू करना चाहते हैं। सरकार के अनुसार, भारत-EU समझौते से मछली पालन, कपड़ा और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, रसायन और फार्मास्यूटिकल उत्पादों के निर्यात में भी वृद्धि की संभावना है।
गौरतलब है कि अगस्त में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्तु एवं सेवा निर्यात रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जिसमें 441.8 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात शामिल था।
इनपुट: IANS



