बाज़ार की अगली दिशा: RBI की नीति, तिमाही नतीजे और मध्य-पूर्व के हालात पर रहेगी निवेशकों की नज़र
छुट्टियों के कारण छोटे रहे पिछले कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाज़ार पर वैश्विक दबाव साफ़ दिखा, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक अपने अहम मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे आ गए। अब अगले सप्ताह बाज़ार का रुख कई…
छुट्टियों के कारण छोटे रहे पिछले कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाज़ार पर वैश्विक दबाव साफ़ दिखा, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक अपने अहम मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे आ गए। अब अगले सप्ताह बाज़ार का रुख कई बड़े घरेलू और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, निवेशकों की निगाहें मुख्य रूप से भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा, कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव पर टिकी रहेंगी।
बाज़ार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो भारतीय बाज़ारों में एक तेज़ राहत भरी तेज़ी आ सकती है। वहीं, RBI की नीतिगत घोषणाएं, विशेषकर महंगाई पर उसका दृष्टिकोण और आर्थिक विकास के अनुमान, घरेलू ब्याज दरों और वित्तीय बाज़ारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।
बीते हफ़्ते बाज़ार का हाल
पिछले हफ़्ते बाज़ार में गिरावट का दौर जारी रहा। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 3 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,421.95 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार, यह गिरावट बाज़ार में चल रहे करेक्शन का ही हिस्सा है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स 1.52% गिरा था, और गुरुवार को इसमें 0.79% की और कमजोरी आई।
तकनीकी संकेतक और वैश्विक कारक
तकनीकी चार्ट पर निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, साप्ताहिक RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) लगभग 31.06 पर है, जो बाज़ार में कमज़ोर गति का संकेत देता है, हालांकि यह ओवरसोल्ड ज़ोन के करीब भी है, जिससे निचले स्तरों पर तकनीकी रिकवरी की संभावना बन सकती है। निफ्टी के लिए तत्काल प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) 22,800 और 23,000 के स्तर पर है, जबकि 22,350 और 22,180 पर इसे मज़बूत समर्थन (सपोर्ट) मिल सकता है।
फिलहाल, बाज़ार की धारणा पर वैश्विक कारकों का असर ज़्यादा है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी, महंगाई की चिंताएं और ऊर्जा की ऊंची कीमतें निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं। हालांकि, घरेलू मोर्चे पर आर्थिक संकेतक मज़बूत हैं। भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि (IIP) अगस्त में बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई के 7.4 प्रतिशत से अधिक है।
इन पर भी रहेगी नज़र
ऊर्जा बाज़ार का रुख भी अहम होगा। हाल में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कुछ नरमी आई है। इसके अलावा, अमेरिका से आने वाले नॉन-फार्म पेरोल्स और ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI जैसे आर्थिक आंकड़े भी वैश्विक बाज़ारों के साथ-साथ भारतीय बाज़ार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। कुल मिलाकर अगला हफ़्ता निवेशकों के लिए उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है।
इनपुट: IANS



