पाकिस्तान पासपोर्ट घोटाला: 'बाहरी साज़िश' या सरकारी तंत्र का भ्रष्टाचार? एक रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
पाकिस्तान में सामने आए एक बड़े पासपोर्ट घोटाले ने देश के प्रशासनिक तंत्र में गहरे बैठे भ्रष्टाचार और व्यवस्थागत खामियों को उजागर कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई एक रिपोर्ट के मुताबिक…
पाकिस्तान में सामने आए एक बड़े पासपोर्ट घोटाले ने देश के प्रशासनिक तंत्र में गहरे बैठे भ्रष्टाचार और व्यवस्थागत खामियों को उजागर कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला सिर्फ अफ़गान नागरिकों द्वारा दस्तावेज़ों में धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि पाकिस्तानी अधिकारियों की मिलीभगत से असली दस्तावेज़ जारी करने का है, जिसने इस्लामाबाद के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह पूरा विवाद तब सामने आया जब पता चला कि हज़ारों अफ़गान नागरिक पाकिस्तानी पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे थे। स्ट्रिंगर एशिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने पाकिस्तान की तीन बड़ी समस्याओं को एक साथ बेनकाब किया है: अफ़गानिस्तान के साथ लगातार बिगड़ते रिश्ते, राजनीतिक रूप से प्रभावित और भ्रष्ट सरकारी संस्थाएँ, और अपनी हर समस्या के लिए बाहरी ताकतों को ज़िम्मेदार ठहराने की पुरानी आदत।
भ्रष्टाचार का नेटवर्क या विदेशी घुसपैठ?
रिपोर्ट में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि कोई भी विदेशी नागरिक पाकिस्तानी परिवार के रिकॉर्ड में शामिल होकर, कम्प्यूटरीकृत राष्ट्रीय पहचान पत्र (CNIC) हासिल कर और फिर पासपोर्ट बनवा ले, यह केवल किसी बाहरी जालसाज़ के बस की बात नहीं है। इसके लिए पाकिस्तानी प्रशासनिक व्यवस्था तक पहुंच, भ्रष्ट बिचौलियों का एक नेटवर्क और कुछ मामलों में अधिकारियों की सीधी मिलीभगत अनिवार्य है।
आधिकारिक तौर पर इस घोटाले के लिए अफ़गान नागरिकों को दोषी ठहराया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि उन्होंने पाकिस्तान की मेहमाननवाज़ी का फ़ायदा उठाकर पहचान प्रणाली में घुसपैठ की और देश की सुरक्षा को खतरे में डाला। हालाँकि, रिपोर्ट बताती है कि यह कहानी असल मुद्दे से ध्यान भटकाने वाली हो सकती है। असलियत यह है कि पाकिस्तानी पहचान एक ऐसी वस्तु बन चुकी है, जिसे सही दलाल के ज़रिए खरीदा जा सकता है।
अधिकारियों पर कार्रवाई और जांच
इस मामले में कुछ कार्रवाई भी हुई है। संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने जुलाई में राष्ट्रीय डाटाबेस एवं पंजीकरण प्राधिकरण (NADRA) के उन अधिकारियों को हिरासत में लिया था, जिन पर अफ़गान नागरिकों की मदद करने का संदेह था। एजेंसी इस नेटवर्क के आतंकी संगठनों से संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, नादरा के कई कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज़ जारी करने में मदद करने के आरोप में आपराधिक कार्रवाई चल रही है और कुछ को नौकरी से भी निकाला गया है। इसके अलावा, पिछले महीने पड़े छापों में 100 से अधिक एजेंटों को गिरफ्तार किए जाने की भी खबर है। रिपोर्ट कहती है कि सरेंडर किए गए पासपोर्ट इस बात का सबूत हैं कि सीमा की सुरक्षा देश के भीतर से ही बेची जा रही थी।
इनपुट: IANS



