बलूचिस्तान: दो महिलाओं और उनके मासूम बच्चों के अपहरण का आरोप, मानवाधिकार संगठनों ने जताई गहरी चिंता
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकार संगठनों ने दो महिलाओं और उनके नाबालिग बच्चों को कथित तौर पर सुरक्षा बलों द्वारा जबरन उठाए जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। समाचार एजेंसी IANS की एक…
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकार संगठनों ने दो महिलाओं और उनके नाबालिग बच्चों को कथित तौर पर सुरक्षा बलों द्वारा जबरन उठाए जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों का बुधवार से कोई पता नहीं चल सका है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
यह घटना बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा के गशकोरी टाउन में हुई। आरोप है कि पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) और फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) के जवानों ने 27 वर्षीय उमैरा बलूच, उनकी आठ साल की बेटी परीसा, 28 वर्षीय नजमा बलूच और उनके डेढ़ साल के बेटे जाकिर को उनके घरों से उठा लिया।
विभिन्न संगठनों ने की निंदा
इस मामले पर कई प्रमुख बलूच मानवाधिकार समूहों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बलूच विमेंस फोरम (BWF) ने इसे व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन से कहीं बढ़कर कानून द्वारा दी गई बुनियादी सुरक्षा पर एक गंभीर हमला बताया। फोरम ने विशेष रूप से डेढ़ साल के बच्चे के कथित अपहरण को 'बेहद भयावह' करार दिया। संगठन ने कहा कि यह कार्रवाई बलूचिस्तान में दंडमुक्ति की संस्कृति और जवाबदेही की कमी को दर्शाती है।
वहीं, बलूचिस्तान ह्यूमन राइट्स काउंसिल (HRCB) ने नाबालिगों को इस तरह हिरासत में लिए जाने को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और बाल अधिकार सम्मेलन का गंभीर उल्लंघन बताया। बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (BVJ) ने आरोप लगाया कि सुरक्षा बल बिना किसी जवाबदेही के काम कर रहे हैं और यह कानून के शासन के प्रति पूरी तरह अनादर है।
तत्काल रिहाई की मांग
HRCB ने पाकिस्तान सरकार से चारों पीड़ितों का तत्काल पता बताने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें बिना शर्त रिहा करने की मांग की है। बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की नेता सबीहा बलूच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सवाल उठाया, "आठ साल की बच्ची और डेढ़ साल के मासूम बच्चे का क्या अपराध हो सकता है? उनका एकमात्र 'अपराध' बलूच होना है।" उन्होंने इसे सामूहिक सजा का सबसे क्रूर रूप बताया।
इनपुट: IANS



