शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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राष्ट्रीय राजमार्गों के पास निर्माण पर रोक: केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देगी चुनौती

केरल सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे निर्माण पर प्रतिबंध लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत जाने का फैसला किया है। सरकार का तर्क है कि यह निर्देश राज्य की घनी आबादी…

राष्ट्रीय राजमार्गों के पास निर्माण पर रोक: केरल सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देगी चुनौती
(फोटो: IANS)

केरल सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे निर्माण पर प्रतिबंध लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत जाने का फैसला किया है। सरकार का तर्क है कि यह निर्देश राज्य की घनी आबादी और भूमि की कमी जैसी विशेष परिस्थितियों में अव्यावहारिक है और इससे हजारों लोगों के घर और कारोबार प्रभावित होंगे।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के लोक निर्माण मंत्री पीके बशीर ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस आदेश को लागू करने से कासरगोड से तिरुवनंतपुरम तक निजी मालिकों की सैकड़ों एकड़ जमीन प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक स्वतः संज्ञान मामले में यह निर्देश दिया था, जिसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा में सुधार करना था।

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय राजमार्गों की केंद्र रेखा के दोनों ओर 40 मीटर के भीतर आवासीय और 75 मीटर के भीतर व्यावसायिक भवनों के निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। आदेश में सर्विस सड़कों और आस-पास के क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त भूमि खाली रखने का भी प्रावधान है। यह निर्देश उत्तर भारत में हुई एक सड़क दुर्घटना के बाद दिया गया था, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी।

केरल सरकार की दलीलें

मंत्री पीके बशीर ने स्पष्ट किया कि केरल की परिस्थितियाँ उस मामले से बिल्कुल अलग हैं जिसके कारण अदालत को यह निर्देश देना पड़ा। उन्होंने कहा, “केरल की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए इतनी बड़ी भूमि को निर्माण के लिए खाली छोड़ना संभव नहीं है। यह व्यावहारिक नहीं है।” सरकार अदालत के समक्ष राज्य के असामान्य रूप से उच्च जनसंख्या घनत्व और सीमित भूमि उपलब्धता का मुद्दा भी उठाएगी।

बशीर ने तर्क दिया कि केरल में राजमार्गों पर प्रवेश और निकास को पहले ही विनियमित कर दिया गया है। वाहन अब सर्विस रोड के हर बिंदु से हाईवे में प्रवेश नहीं कर सकते, बल्कि उन्हें निर्दिष्ट स्थानों का ही उपयोग करना होता है। ऐसे में, दुर्घटना का वह जोखिम मौजूद नहीं है जिसका जिक्र मूल मामले में किया गया था।

आदेश का संभावित प्रभाव

मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि इस निर्देश में बदलाव नहीं किया गया तो हजारों घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित होंगे। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पूरे केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग 66 को छह लेन का बनाने का काम चल रहा है। इस आदेश से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा अनुशंसित कई नई परियोजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। बशीर ने कहा, “राज्य सरकार इस मामले पर स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाएगी और सुप्रीम कोर्ट से उचित राहत की मांग करेगी।”

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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