ओडिशा में 40 लाख से ज़्यादा लोग साइबर सुरक्षा अभियान से जुड़े, छात्रों को बनाया गया 'एंबेसडर'
ओडिशा में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़े जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य छात्रों और युवाओं को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाना और उन्हें…
ओडिशा में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़े जागरूकता अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य छात्रों और युवाओं को डिजिटल दुनिया के खतरों से बचाना और उन्हें सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित करना है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस राज्यव्यापी कार्यक्रम में 40 लाख से अधिक छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और पुलिसकर्मियों ने हिस्सा लिया।
यह कार्यक्रम ओडिशा पुलिस द्वारा स्कूल और जन शिक्षा विभाग तथा उच्च शिक्षा विभाग के साथ मिलकर आयोजित किया गया था। इसकी अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक (क्राइम ब्रांच) विनयतोष मिश्रा ने की। अभियान के तहत राज्य के 35 पुलिस जिलों के 20,000 से ज़्यादा स्कूलों और 2,000 से अधिक कॉलेजों को लाइव वेबकास्ट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जोड़ा गया।
क्यों पड़ी इस अभियान की ज़रूरत?
एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि छात्र और युवा आजकल ऑनलाइन धोखाधड़ी, ब्लैकमेल और कई तरह के डिजिटल शोषण का आसानी से शिकार हो रहे हैं। कई मामलों में लोग अनजाने में ही अपने बैंक खाते, सिम कार्ड या पहचान पत्र जैसी ज़रूरी जानकारी साइबर अपराधियों को सौंप देते हैं, जिसका वे गलत इस्तेमाल करते हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए यह पहल की गई है।
अभियान का लक्ष्य सिर्फ़ जानकारी देना ही नहीं, बल्कि युवाओं को 'साइबर जागरूकता का एंबेसडर' बनाना भी है, ताकि वे अपने परिवार और समाज में भी इस ज्ञान को फैला सकें। इस मौके पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी साइबर-सुरक्षित ओडिशा बनाने में युवाओं की भूमिका पर ज़ोर दिया और उनसे इस संदेश को आगे बढ़ाने की अपील की। वहीं, ओडिशा के गवर्नर ने छात्रों से साइबर सुरक्षा को लेकर हमेशा सतर्क रहने का आग्रह किया।
धोखाधड़ी होने पर क्या करें?
कार्यक्रम के दौरान लोगों को ज़रूरी सलाह भी दी गई। बताया गया कि किसी भी तरह की ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर '1930' पर कॉल करें और पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएँ। अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि धोखाधड़ी की सूचना जितनी जल्दी दी जाएगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ जाएगी। यह भी स्पष्ट किया गया कि कोई भी बैंक, सरकारी कार्यालय या पुलिस अधिकारी कभी भी फोन पर ओटीपी, पिन, सीवीवी या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी नहीं मांगता है।
इनपुट: IANS



