PM सूर्य घर योजना: 48 लाख से ज़्यादा परिवारों को मिली राहत, लाखों के बिजली बिल हुए 'ज़ीरो'
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' से देश के लाखों परिवारों के बिजली बिल में बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 18.93…
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' से देश के लाखों परिवारों के बिजली बिल में बड़ी राहत मिली है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 18.93 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों का कम से कम एक महीने का बिजली बिल 'शून्य' आया है, जिनमें ग्रामीण परिवार भी शामिल हैं। यह योजना अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा करने और खर्च घटाने का अवसर देती है।
इस साल फरवरी में शुरू हुई इस योजना ने तेज़ी से लोकप्रियता हासिल की है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने राज्यसभा में जानकारी दी कि अब तक देश भर में कुल 48,02,717 परिवारों को इस पहल का लाभ मिल चुका है। इसके तहत कुल 39,72,447 रूफटॉप सोलर (RTS) सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं।
योजना की प्रगति और क्षमता विस्तार
आंकड़ों पर नज़र डालें तो अकेले वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही 18.71 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए, जिससे 22.71 लाख परिवारों को फायदा पहुँचा। इन नए इंस्टॉलेशन से देश की सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में 6.7 गीगावाट (GW) की बढ़ोतरी हुई है। यह योजना भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
मंत्री ने स्पष्ट किया कि 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' एक मांग-आधारित (Demand-Driven) योजना है। इसका मतलब है कि देश का कोई भी आवासीय उपभोक्ता, जिसके पास स्थानीय बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) का वैध कनेक्शन है, इसका लाभ उठा सकता है। इच्छुक व्यक्ति राष्ट्रीय पोर्टल के माध्यम से इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
हालांकि, यह योजना सिर्फ घरों तक ही सीमित नहीं है। सरकारी भवनों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों में भी रूफटॉप सोलर प्लांट लगाए जा सकते हैं। लेकिन इन श्रेणियों के लिए केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) का प्रावधान नहीं है, क्योंकि सरकार मानती है कि उनके लिए यह प्रोजेक्ट बिना सब्सिडी के भी आर्थिक रूप से फायदेमंद है।
सौर ऊर्जा का भविष्य
भारत में सौर ऊर्जा के भविष्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान भी बेहद सकारात्मक है। एजेंसी के अनुसार, साल 2030 तक भारत की बिजली की अतिरिक्त मांग का लगभग 50% हिस्सा अकेले सौर ऊर्जा से पूरा होने की संभावना है। वहीं, लगभग 25% अतिरिक्त मांग पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा जैसे अन्य स्रोतों से पूरी होगी।
इनपुट: IANS



