तिरुवनंतपुरम: भाजपा पार्षद की ज़मानत पर क्यों टिका है नगर निगम में पार्टी का बहुमत?
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। पार्टी अपने एक पार्षद की ज़मानत के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाने की तैयारी में है, क्योंकि
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम के नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। पार्टी अपने एक पार्षद की ज़मानत के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाने की तैयारी में है, क्योंकि इस एक सीट पर ही केरल के सबसे बड़े शहरी निकाय में उसका मामूली बहुमत टिका हुआ है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला भाजपा पार्षद आर. सुगथन से जुड़ा है, जो फिलहाल केरल असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (केएएपीए) के तहत न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी रिहाई अब पार्टी के लिए महज़ कानूनी नहीं, बल्कि सियासी अस्तित्व की लड़ाई बन गई है।
समय के साथ एक बड़ी दौड़
इस मामले में भाजपा पर समय का भारी दबाव है। दरअसल, केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 20 पार्षदों को पद की शपथ का उल्लंघन करने पर अयोग्य घोषित कर दिया था। अदालत ने उन्हें चार सप्ताह के भीतर दोबारा शपथ लेने का निर्देश दिया था। इनमें से 19 पार्षद तो फिर से शपथ ले चुके हैं, लेकिन जेल में होने के कारण आर. सुगथन यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं।
अगर सुगथन 24 जुलाई की समय सीमा से पहले रिहा होकर दोबारा शपथ नहीं ले पाते हैं, तो वह स्थायी रूप से अपनी पार्षद की सीट खो देंगे। यह भाजपा के लिए एक बड़ा झटका होगा, क्योंकि इसी के साथ नगर निगम में उसका बहुमत भी खत्म हो जाएगा।
क्या कहते हैं निगम के समीकरण?
वर्तमान में 101 सदस्यों वाले तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा के पास 50 पार्षद हैं और उसे एक निर्दलीय पार्षद का भी समर्थन हासिल है। इसी 51 के आंकड़े के बल पर पार्टी ने पहली बार निगम में सत्ता हासिल की थी।
यदि सुगथन अपनी सीट गंवा देते हैं, तो भाजपा की प्रभावी संख्या 49 रह जाएगी, जो साधारण बहुमत से कम है। वहीं, विपक्ष में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) के पास 29 पार्षद और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) के पास 20 पार्षद हैं। एक अन्य निर्दलीय पार्षद भी वाम दलों से जुड़ा हुआ है।
आगे की कानूनी राह
सुगथन की ज़मानत याचिका पर केएएपीए सलाहकार बोर्ड ने 29 जून को सुनवाई की थी, लेकिन फैसला आने में देरी हो रही है। इसी के चलते अब वह ज़मानत के लिए केरल हाई कोर्ट का रुख करने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि सुगथन के सीट हारने से विपक्ष को सीधे तौर पर सत्ता नहीं मिलेगी, लेकिन यह भाजपा की स्थिति को बेहद कमज़ोर कर देगा और अहम फैसलों के दौरान प्रशासन को अस्थिर बना सकता है।
इनपुट: IANS



