NEET-UG पेपर लीक: CBI को अन्य संदिग्धों की जांच के लिए मिली कोर्ट की मंज़ूरी
NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अब कुछ अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच करेगी। दिल्ली की एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने शुक्रवार को CBI की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें…
NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अब कुछ अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच करेगी। दिल्ली की एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने शुक्रवार को CBI की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें जांच का दायरा बढ़ाने की अनुमति मांगी गई थी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस फैसले के बाद एजेंसी उन अतिरिक्त संदिग्धों की गतिविधियों की गहराई से पड़ताल कर सकेगी, जिनका नाम 13 मुख्य आरोपियों के अलावा सामने आया है।
यह मामला 3 मई को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने से जुड़ा है, जिसे बाद में रद्द कर दिया गया था। CBI ने अदालत में अपनी याचिका में दलील दी थी कि 13 आरोपियों के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन इस व्यापक साजिश में कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता की जांच करना अभी बाकी है।
चार्जशीट और आरोपियों की भूमिका
इससे पहले 28 जुलाई को CBI ने गिरफ्तार किए गए सभी 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर अदालत ने बुधवार को संज्ञान लिया। चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि NTA के विषय विशेषज्ञों, बिचौलियों और कोचिंग संचालकों के एक नेटवर्क ने परीक्षा से पहले ही गोपनीय प्रश्नपत्र लीक कर दिए थे।
एजेंसी ने दावा किया है कि प्रश्नपत्रों के अनुवाद और प्रूफरीडिंग के लिए जिम्मेदार NTA के तीन विषय विशेषज्ञों ने सुरक्षा में खामियों का फायदा उठाकर प्रश्नों को दिल्ली स्थित NTA कार्यालय से बाहर निकाला।
कैसे लीक हुआ पेपर?
CBI के मुताबिक, आरोपी पी.वी. कुलकर्णी ने रसायन विज्ञान के सभी 135 प्रश्न और उनके विकल्प छोटे कागजों पर लिखकर उन्हें गोपनीय अनुभाग से बाहर छिपाकर निकाल लिया। वहीं, एक अन्य आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंडारे ने होटल लौटकर अपनी याददाश्त के आधार पर प्रश्नों को फिर से तैयार किया, जबकि मनीषा संजय हवालदार ने भौतिकी के प्रश्नों का संक्षिप्त विवरण अपने ठिकाने पर जाकर लिखा।
जांच में यह भी सामने आया है कि NTA के गोपनीय अनुभाग में विशेषज्ञों की तलाशी की कोई व्यवस्था नहीं थी। CBI ने NTA कार्यालय में CCTV निगरानी की कमियों को भी उजागर किया है, जिसमें फुटेज का बैकअप सिर्फ 20-25 दिनों तक ही उपलब्ध था। एजेंसी ने अपने मामले को पुख्ता करने के लिए 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का हवाला दिया है।
इनपुट: IANS



