भारत का रक्षा क्षेत्र: उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड उछाल, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के रक्षा उत्पादन और निर्यात ने पिछले दशक में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के रक्षा उत्पादन और निर्यात ने पिछले दशक में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा लागू किए गए व्यापक सुधारों के चलते देश सैन्य उपकरणों के निर्माण में एक आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय शक्ति के रूप में उभरा है। 2029 तक, सरकार ने सालाना 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
आंकड़े दर्शाते हैं कि 2013-14 में देश का रक्षा उत्पादन महज़ 4,746 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 तक रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुँच गया। इस उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSUs) की हिस्सेदारी 76% रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 24% का योगदान दिया।
निर्यात में जबरदस्त उछाल
रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी भारत ने बड़ी छलांग लगाई है। जो निर्यात 2013-14 में सिर्फ 686 करोड़ रुपये था, वह 2025-26 में बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया। आज भारतीय सैन्य उपकरणों की मांग 80 से अधिक देशों में है। कुल निर्यात में निजी क्षेत्र की भागीदारी 45.16% (17,353 करोड़ रुपये) रही, जबकि रक्षा PSUs ने 54.84% (21,071 करोड़ रुपये) का योगदान दिया।
नीतिगत सुधार और स्वदेशी खरीद पर जोर
इस बदलाव के पीछे रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) 2020 और रक्षा खरीद प्रक्रिया (DPP) 2016 जैसे नीतिगत सुधारों की अहम भूमिका रही है। इन नीतियों ने 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देते हुए स्वदेशी खरीद और घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता दी है। इसी क्रम में, रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की उन रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी है, जिन्हें DRDO ने डिजाइन किया है और भारतीय उद्योग ने बनाया है।
इसमें करीब 62,000 करोड़ रुपये की लागत से 97 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों और लगभग 62,700 करोड़ रुपये में 156 'प्रचंड' हेलीकॉप्टरों की खरीद शामिल है। इन परियोजनाओं से देश की एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूती मिल रही है।
अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा
रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए भी आवंटन में भारी वृद्धि की गई है। यह राशि 2014-15 के 13,716.14 करोड़ रुपये से 112% बढ़कर 2026-27 में 29,100.25 करोड़ रुपये हो गई है। नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए, 2022-23 से R&D बजट का 25% हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के लिए भी खोला गया है। इसके अलावा, DRDO की 24 प्रयोगशालाओं की परीक्षण सुविधाओं को डिफेंस टेस्टिंग पोर्टल (DTP) के जरिए उद्योग के लिए सुलभ बनाया गया है।
इनपुट: IANS



