बुधवार, 29 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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खाद की कालाबाज़ारी रोकने के लिए सरकार की बड़ी कार्रवाई, साल 2025 में पौने पांच लाख छापे मारे गए

किसानों को सही दाम पर अच्छी क्वालिटी की खाद मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में खाद की कालाबाजारी…

खाद की कालाबाज़ारी रोकने के लिए सरकार की बड़ी कार्रवाई, साल 2025 में पौने पांच लाख छापे मारे गए
(फोटो: IANS)

किसानों को सही दाम पर अच्छी क्वालिटी की खाद मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और मिलावट के खिलाफ देशभर में करीब 4.85 लाख छापे मारे गए। इस कार्रवाई के दौरान गड़बड़ी करने वालों पर सख़्त कदम उठाए गए।

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रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राज्यसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन छापों के बाद 17,392 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और 6,941 लाइसेंस या तो निलंबित कर दिए गए या रद्द कर दिए गए। इसके अलावा, 847 मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई है।

मांग से ज़्यादा खाद उपलब्ध

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में खाद की कोई कमी नहीं है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान यूरिया, डीएपी (DAP), एमओपी (MOP) और एनपीकेएस (NPKS) जैसे प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता उनकी ज़रूरत से काफी ज़्यादा रही। उदाहरण के लिए, यूरिया की 381 लाख मीट्रिक टन की मांग के मुकाबले 450.79 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध थी। इसी तरह, 110 लाख मीट्रिक टन डीएपी की ज़रूरत के सामने 121.72 लाख मीट्रिक टन की सप्लाई मौजूद थी।

कैसे काम करता है सिस्टम?

सरकार यह सुनिश्चित करती है कि किसानों तक खाद बिना किसी रुकावट के और सस्ते दाम पर पहुंचे। इसके लिए एक व्यवस्थित प्रक्रिया अपनाई जाती है:

  • मांग का आकलन: कृषि और उर्वरक विभाग राज्यों के साथ मिलकर यह तय करते हैं कि किस राज्य को महीने के हिसाब से कितनी खाद चाहिए।
  • सप्लाई की निगरानी: इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) के जरिए खाद की हर खेप पर नज़र रखी जाती है।
  • समय पर आयात: घरेलू उत्पादन और मांग के अंतर को पाटने के लिए सरकार समय से पहले ही खाद का आयात तय कर लेती है। रेलवे के साथ मिलकर मालगाड़ियों के जरिए खाद की ढुलाई को प्राथमिकता दी जाती है।

किसानों को मिलती है सब्सिडी

सरकार दो योजनाओं—यूरिया सब्सिडी योजना और पोषक तत्व-आधारित सब्सिडी (एनबीएस) योजना—के ज़रिए खाद को सस्ता बनाए रखती है। यूरिया सब्सिडी योजना के तहत 45 किलो के यूरिया बैग की अधिकतम खुदरा कीमत 242 रुपये तय है। लागत और बिक्री मूल्य के बीच के अंतर को सरकार सब्सिडी के तौर पर निर्माताओं या आयातकों को देती है। इसी तरह, खरीफ 2026 के दौरान डीएपी के 50 किलो के बैग की कीमत 1,350 रुपये रखने के लिए 3,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन की अतिरिक्त सहायता दी गई है। मंत्री ने यह भी बताया कि कीटनाशकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए भी कड़े नियम हैं और नियमित तौर पर सैंपल जांचे जाते हैं।

इनपुट: IANS

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