जयपुर रोपवे प्रोजेक्ट: वन भूमि पर अवैध कब्ज़े और गतिविधियों को लेकर NGT का कड़ा रुख, कार्रवाई के निर्देश
जयपुर के चर्चित रोपवे प्रोजेक्ट में वन भूमि पर अवैध कब्ज़े और व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार को हुई…
जयपुर के चर्चित रोपवे प्रोजेक्ट में वन भूमि पर अवैध कब्ज़े और व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार को हुई सुनवाई में एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने पाया कि प्रोजेक्ट का एक बड़ा हिस्सा गैर-कानूनी रूप से आरक्षित वन क्षेत्र में बनाया गया है। इस पर ट्रिब्यूनल ने राजस्थान वन विभाग को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
यह मामला एक साल से अधिक समय से लंबित है, जिस पर NGT ने नाराज़गी जताते हुए कहा कि अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ट्रिब्यूनल ने राजस्थान के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी करने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। कोर्ट को यह भी बताया गया कि पीसीसीएफ ने ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है।
वन विभाग की रिपोर्ट में गंभीर उल्लंघन
सुनवाई के दौरान वन विभाग और एक जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, रोपवे के ऊपरी और निचले स्टेशन समेत इसका कुछ हिस्सा उस ज़मीन पर बना है, जो कानूनी तौर पर प्रोजेक्ट के लिए आवंटित ही नहीं की गई थी। इसके अलावा, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट की रिपोर्ट में कई अन्य अवैध गतिविधियों का भी ज़िक्र है।
इनमें बिना अनुमति के रेस्तरां चलाना, फिश स्पा और बॉडी मसाज पार्लर खोलना, खाना पकाने के लिए खुली आग का इस्तेमाल करना और प्लास्टिक कचरे का सही ढंग से निस्तारण न करना शामिल है। साथ ही, अवैध लाइटिंग और बिना किसी पर्यावरण व सुरक्षा मंजूरी के जिपलाइन साइकिल राइड चलाने जैसी गतिविधियां भी पाई गईं।
NGT के स्पष्ट निर्देश और अगली सुनवाई
ट्रिब्यूनल ने वन विभाग को स्पष्ट आदेश दिया है कि रोपवे के लिए कानूनी रूप से दी गई ज़मीन के अलावा बाकी पूरे वन क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। NGT ने कहा है कि जहां भी अवैध कब्ज़ा पाया गया है, उसे तुरंत खाली कराया जाए। साथ ही, इस मामले में ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया है।
एनजीटी ने पीसीसीएफ या उनके द्वारा अधिकृत चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट स्तर के अधिकारी से दो सप्ताह के भीतर शपथपत्र के साथ एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी है। इस मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को तय की गई है।
इनपुट: IANS



