गुरूवार, 10 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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किसानों को अब ऑन-डिमांड मिलेगा लोन! NABARD की AI आधारित तकनीक बदल देगी ग्रामीण भारत की तस्वीर

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर किसानों…

किसानों को अब ऑन-डिमांड मिलेगा लोन! NABARD की AI आधारित तकनीक बदल देगी ग्रामीण भारत की तस्वीर
(फोटो: IANS)

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर किसानों के लिए एक 'ऑन-डिमांड' लोन मॉडल विकसित कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस पहल का मकसद किसानों और ग्रामीण परिवारों तक वित्तीय सेवाओं को ज़्यादा तेज़ी और आसानी से पहुंचाना है।

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मुंबई में आयोजित 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026' में नाबार्ड के चेयरमैन शाजी कृष्णन वी. ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस AI-आधारित मॉडल से ग्रामीण वित्तीय प्रणाली को अधिक डिजिटल और प्रभावी बनाया जाएगा, जिससे किसानों को ज़रूरत के समय पर आसानी से किसान क्रेडिट लोन मिल सकेगा।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से पट रही है खाई

शाजी कृष्णन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि केंद्र सरकार द्वारा विकसित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने ग्रामीण और शहरी भारत के बीच की दूरी को कम करने के लिए एक मज़बूत नींव तैयार की है। उनके अनुसार, देश की लगभग 45% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है, इसलिए भारत की तेज आर्थिक वृद्धि के लिए समावेशी विकास बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा, "यदि भारत को तेजी से आगे बढ़ना है तो समाज के हर वर्ग का विकास जरूरी है।"

चेयरमैन के मुताबिक, कृषि, मत्स्य पालन, डेयरी और अन्य संबंधित क्षेत्रों में डिजिटलीकरण तेजी से बढ़ रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण वितरण और वित्तीय समावेशन को मज़बूत करने के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। अगला कदम आधार जैसी पहचान प्रणालियों को आर्थिक गतिविधियों से बेहतर ढंग से जोड़ना है, ताकि वित्तीय सेवाएं और सुलभ हो सकें।

एग्री स्टैक और मौजूदा चुनौतियाँ

इस मौके पर उन्होंने 'एग्री स्टैक' की भी चर्चा की, जिसे कृषि क्षेत्र के लिए विकसित किया जा रहा है। इसमें पहचान की जानकारी, भूमि रिकॉर्ड और फसल संबंधी डेटा शामिल है, जो एक मज़बूत डिजिटल आधार तैयार कर रहा है। कृष्णन ने कहा कि इसके साथ एक सशक्त वित्तीय ढांचे की भी ज़रूरत है, ताकि किसानों को सही समय पर सही वित्तीय उत्पाद मिलें।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ग्रामीण वित्त क्षेत्र में अब भी कई चुनौतियां हैं। उन्होंने बताया कि भारत के कृषि क्षेत्र में अभी भी लगभग 1.3 लाख करोड़ रुपए का ऋण अंतर (क्रेडिट गैप) मौजूद है। इसके अलावा, ऋण संवर्धन व्यवस्था, ऋण गारंटी और बीमा कवरेज से जुड़ी कमियां भी प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि कृषि ऋण स्वाभाविक रूप से ज़्यादा जोखिम वाले होते हैं, क्योंकि उनकी वापसी मौसम, उत्पादन और बाजार जैसे कई बाहरी कारकों पर निर्भर करती है। इसके बावजूद, पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र के NPA स्तर में कमी आई है और इसमें आगे भी सुधार की गुंजाइश है।

इनपुट: IANS

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