शनिवार, 22 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार, पुर्जों के लिए आयात पर निर्भरता होगी कम

भारत में मोबाइल फोन बनाने की प्रक्रिया को और बढ़ावा देने के लिए सरकार की नई 'मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (MPMS) को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह…

भारत में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार, पुर्जों के लिए आयात पर निर्भरता होगी कम
(फोटो: IANS)

भारत में मोबाइल फोन बनाने की प्रक्रिया को और बढ़ावा देने के लिए सरकार की नई 'मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (MPMS) को उद्योग जगत से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई गति देगी, जिससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ेगा और मोबाइल के पुर्जों के लिए आयात पर निर्भरता कम होगी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह योजना देश में इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने में भी अहम साबित हो सकती है।

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पहले से चल रही 'इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम' (ECMS) के तहत अब तक 106 परियोजनाओं को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से 38 प्लांट उत्पादन शुरू कर चुके हैं, जबकि 16 प्रोजेक्ट निर्माण के अंतिम चरण में हैं। इसी कड़ी में हाल ही में 31 नई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई, जिनमें करीब 6,844 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इससे पहले, सिर्फ पांच महीनों में 61,671 करोड़ रुपए के निवेश वाली 75 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी।

आयात पर निर्भरता खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम

इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा कि भारत लंबे समय तक मल्टीलेयर पीसीबी, डिस्प्ले मॉड्यूल और सेंसर जैसे जरूरी इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों के लिए आयात पर निर्भर रहा है। उन्होंने कहा, "उद्योग जगत लंबे समय से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, मजबूत डिजाइन टीम विकसित करने और स्थानीय स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाने की जरूरत पर जोर दे रहा था। मौजूदा आंकड़े दर्शाते हैं कि यह बदलाव अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है।"

चंदक के अनुसार, नई परियोजनाओं के तहत देश में पहली बार फिल्टर, कॉइल और स्पीकर जैसे प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों के साथ-साथ एसिटिलीन ब्लैक और इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स जैसे कच्चे माल का भी घरेलू उत्पादन शुरू होगा। उन्होंने कहा कि यह बदलाव भारत को सिर्फ एक मोबाइल असेंबली हब से आगे ले जाकर एक घटक-आधारित विनिर्माण मॉडल की ओर बढ़ा रहा है।

उत्पादन और निर्यात में भारी उछाल

ईवाई इंडिया में दूरसंचार क्षेत्र के प्रमुख प्रशांत सिंघल ने बताया कि पिछली योजनाओं की सफलता के कारण वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना और मोबाइल निर्यात 165 गुना बढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि नई योजना इस सफलता को और आगे बढ़ाएगी। सिंघल ने यह भी बताया कि नई स्कीम में भारतीय मोबाइल ब्रांडों को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिसमें घरेलू स्तर पर पुर्जों की खरीद और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त लाभ शामिल हैं। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और देश में एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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