मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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GDP आंकड़ों पर बहस: SBI रिसर्च ने 42 लाख करोड़ की कमी के दावों को 'मनगढ़ंत कहानी' बताकर किया खारिज

भारतीय अर्थव्यवस्था के नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) के अनुमानों को लेकर चल रही बहस पर एसबीआई रिसर्च ने अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इसमें उन दावों को खारिज किया गया है जिनमें कहा जा रहा है कि…

GDP आंकड़ों पर बहस: SBI रिसर्च ने 42 लाख करोड़ की कमी के दावों को 'मनगढ़ंत कहानी' बताकर किया खारिज
(फोटो: IANS)

भारतीय अर्थव्यवस्था के नॉमिनल जीडीपी (Nominal GDP) के अनुमानों को लेकर चल रही बहस पर एसबीआई रिसर्च ने अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इसमें उन दावों को खारिज किया गया है जिनमें कहा जा रहा है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही तक के आंकड़ों में 42 लाख करोड़ रुपये की कमी करके दिखाया गया है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से एसबीआई की इस रिपोर्ट में ऐसे दावों को "बिना किसी तर्क के लिखी गई कहानी जैसा" बताया गया है।

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष के अनुसार, हाल ही में पहली तिमाही के 7.8% जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े आने के बाद चार प्रमुख सवाल उठाए गए हैं, जिन पर व्यापक चर्चा की जरूरत है। ये सवाल राजनीतिक और आर्थिक दोनों प्रकृति के हैं।

आधार वर्ष में बदलाव है मुख्य कारण

रिपोर्ट का मुख्य तर्क यह है कि अलग-अलग आधार वर्ष (Base Year) वाली जीडीपी श्रृंखलाओं की तुलना करना "बेतुका और बौद्धिक बेईमानी का पक्का संकेत" है। भारत में समय-समय पर जीडीपी गणना के लिए आधार वर्ष को बदला जाता रहा है, जैसे वित्त वर्ष 2005, 2012 और हाल ही में 2023। एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, जब वित्त वर्ष 2023 को नया आधार वर्ष बनाया गया तो गणना के तरीके में भी बदलाव आया, जो आंकड़ों में संशोधन की मुख्य वजह है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2023 की पहली तिमाही से वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के बीच 14 तिमाहियों में नॉमिनल जीडीपी में 41.8 लाख करोड़ रुपये का संशोधन हुआ। वहीं, इससे पहले की 56 तिमाहियों में यह संशोधन केवल 10.1 लाख करोड़ रुपये था।

किन सेक्टरों में हुआ सबसे ज्यादा बदलाव?

विश्लेषण से पता चलता है कि जीडीपी के आंकड़ों में हुए बदलाव का लगभग 95% हिस्सा मुख्य रूप से 'ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन' जैसे क्षेत्रों से संबंधित है, जहां 39 लाख करोड़ रुपये की कमी की गई। वहीं दूसरी ओर, 'फाइनेंस, इंश्योरेंस, रियल एस्टेट और बिजनेस सर्विस' जैसे संगठित क्षेत्रों में 13.6 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, "इस अलग-अलग तरह के बदलाव को अनौपचारिक/गैर-निगमित सेक्टर में आर्थिक गतिविधियों की संरचना की बेहतर मैपिंग के तौर पर देखा जा सकता है।" नए आधार वर्ष में असंगठित क्षेत्र का आकलन करने के लिए ASUSE और PLFS जैसे सर्वेक्षणों के प्रत्यक्ष डेटा का इस्तेमाल किया गया है, जबकि पहले इसके लिए प्रॉक्सी इंडिकेटर उपयोग होते थे।

संशोधन का कोई राजनीतिक पैटर्न नहीं

एसबीआई रिसर्च ने इस दावे को भी खारिज किया कि आंकड़ों में संशोधन किसी राजनीतिक पैटर्न के तहत हो रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2009 से अब तक 70 तिमाहियों में 239 बार संशोधन हुए हैं, जिनमें 134 बार आंकड़े ऊपर की ओर और 105 बार नीचे की ओर संशोधित किए गए। इससे स्पष्ट होता है कि बदलाव अनियमित रहे हैं और किसी भी सरकार के कार्यकाल में इनका कोई तय पैटर्न नहीं रहा।

इनपुट: IANS

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