गुरूवार, 3 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे की भूख हड़ताल के बीच सरकार का जवाब, बातचीत के लिए तैयार, गिनाए अपने कदम

मराठा समुदाय को आरक्षण और कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पांचवें दिन भी जारी है। इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने आंदोलन पर…

मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे की भूख हड़ताल के बीच सरकार का जवाब, बातचीत के लिए तैयार, गिनाए अपने कदम
(फोटो: IANS)

मराठा समुदाय को आरक्षण और कुनबी जाति प्रमाण पत्र देने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पांचवें दिन भी जारी है। इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने आंदोलन पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए बातचीत की पेशकश की है और मांगों को पूरा करने के लिए उठाए जा रहे कदमों का ब्योरा दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने जरांगे पाटिल से अनशन खत्म करने की अपील की है।

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कैबिनेट मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील और उदय सामंत ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि जालना के जिला कलेक्टर ने खुद मनोज जरांगे पाटिल से मिलकर उन्हें कुनबी प्रमाण पत्र जारी करने से संबंधित सरकार का मसौदा प्रस्ताव सौंपा है। प्रशासन अब इस पर उनकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। जानकारी के अनुसार, कलेक्टर ने कार्यकर्ता को 58 लाख एंट्रीज के रिकॉर्ड वाली एक पेन ड्राइव भी दी है।

प्रमाण पत्र और कानूनी मामले

सरकार ने बताया है कि हैदराबाद गजट फ्रेमवर्क के तहत अब तक 3,500 से ज्यादा प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं और इस प्रक्रिया की निगरानी जिला कलेक्टर द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत हो रही है। मंत्रियों ने घोषणा की कि आवेदनों पर तेजी से कार्रवाई करने और प्रमाण पत्र जारी करने के लिए 10 से 17 सितंबर तक सभी प्रशासनिक क्षेत्रों में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। हर जिले में इस काम की देखरेख के लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा, एक समर्पित मराठा सेल बनाया गया है जो अब तक 2.5 लाख आवेदनों पर कार्रवाई कर चुका है। सरकार के अनुसार, मराठा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज 90 प्रतिशत पुलिस केस वापस ले लिए गए हैं और केवल 118 मामले कानूनी समाधान के लिए लंबित हैं।

आंदोलन पीड़ितों और छात्रों के लिए कदम

आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों की मदद के लिए भी सरकार ने जानकारी दी। वित्तीय सहायता और रोजगार के लिए मिले 222 आवेदनों में से 33 लोगों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है, जबकि 85 पर कार्रवाई चल रही है। महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) में रोजगार से जुड़े 40 दावों के समाधान के लिए छत्रपति संभाजीनगर में एक विशेष कैंप लगाया जाएगा।

शैक्षणिक मोर्चे पर, मराठा छात्रों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों के बराबर लाभ दिए जा रहे हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी छात्र का कुनबी प्रमाण पत्र का आवेदन खारिज हो जाता है, तो उसकी शिक्षा का खर्च आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) योजना के तहत उठाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सारथी संगठन ने 1,000 छात्रों की क्षमता वाले आठ हॉस्टल बनाए हैं और इसे तालुका स्तर तक बढ़ाने की योजना है।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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