पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पत्रकारों पर कार्रवाई और इंटरनेट ब्लैकआउट, CPJ ने जताई गहरी चिंता
प्रेस की स्वतंत्रता की पैरवी करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन 'कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स' (CPJ) ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मीडिया की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समाचार…
प्रेस की स्वतंत्रता की पैरवी करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन 'कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स' (CPJ) ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मीडिया की बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से पत्रकारों पर कार्रवाई तत्काल रोकने, सूचना तक पहुंच बहाल करने और क्षेत्र में स्वतंत्र रिपोर्टिंग की अनुमति देने की मांग की है।
PoK में हाल के दिनों में तनाव काफी बढ़ गया है, जहाँ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 50 से अधिक लोगों के मारे जाने और सैकड़ों के घायल होने की खबर है, हालाँकि वास्तविक संख्या इससे अधिक होने की आशंका जताई जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में सीपीजे ने पत्रकारों को हिरासत में लेने, उनके लापता होने और संचार सेवाओं पर पाबंदी जैसी घटनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है।
हिरासत में पत्रकार और लापता रिपोर्टर
सीपीजे ने विशेष रूप से तीन पत्रकारों की स्थिति पर चिंता जाहिर की है। संगठन ने बताया कि विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले स्वतंत्र कश्मीरी पत्रकार सैयद फरहाद अली शाह अभी भी हिरासत में हैं। 28 जुलाई को बाघ जिले में भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से उनकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। सीपीजे ने कहा, “अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा मिले और उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।”
इसके अलावा, पत्रकार रजी ताहिर और मुहम्मद सैफ 1 अगस्त से लापता हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें कथित तौर पर पुलिस की वर्दी में आए लोगों द्वारा ले जाया गया था। सीपीजे ने मांग की, “यदि वे सरकारी हिरासत में हैं तो पाकिस्तानी अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए, उचित कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए और उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए।”
इंटरनेट और मीडिया पर प्रतिबंध
रिपोर्ट के अनुसार, PoK में 5 जून से ही "आंशिक इंटरनेट ब्लैकआउट और दूरसंचार पर प्रतिबंध" लागू है। इसके अतिरिक्त, कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया है कि PoK से रिपोर्टिंग के बाद 1 अगस्त को पाकिस्तान में अल जजीरा जैसे कुछ अंतरराष्ट्रीय प्रसारकों की वेबसाइटों को भी प्रतिबंधित कर दिया गया। इन प्रतिबंधों ने क्षेत्र में पारदर्शिता और सूचना के स्वतंत्र प्रवाह को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
इनपुट: IANS



