गुजरात में मारुति सुजुकी का नया प्लांट शुरू, अब एक ही जगह बनेंगे 10 लाख वाहन, पहली गाड़ी होगी इलेक्ट्रिक 'ई-विटारा'
भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने गुजरात के हंसलपुर में अपने चौथे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन…
भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने गुजरात के हंसलपुर में अपने चौथे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए प्लांट के साथ ही हंसलपुर परिसर अब एक ही स्थान पर 10 लाख (1 मिलियन) वाहन सालाना बनाने की क्षमता वाला देश का सबसे बड़ा यात्री वाहन निर्माण केंद्र बन गया है।
पहले इस परिसर की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 7.5 लाख यूनिट थी, जो अब बढ़कर 10 लाख यूनिट हो गई है। यह उपलब्धि सुजुकी के लिए भी वैश्विक स्तर पर एक मील का पत्थर है, क्योंकि हंसलपुर दुनिया में सुजुकी का पहला ऐसा मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स है, जहाँ एक ही जगह पर हर साल दस लाख गाड़ियाँ बनाई जा सकती हैं।
कुल उत्पादन क्षमता और निवेश
इस विस्तार के बाद, पूरे भारत में मारुति सुजुकी की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता अब 29 लाख (2.9 मिलियन) वाहनों तक पहुँच गई है। कंपनी ने बताया कि हंसलपुर परियोजना में अब तक कुल 25,288.7 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। अकेले इस चौथे और नए प्लांट के निर्माण पर ही करीब 3,900 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
ई-विटारा से इलेक्ट्रिक बाज़ार में दस्तक
मारुति सुजुकी इस नए प्लांट का इस्तेमाल भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बाज़ार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के लिए करेगी। प्लांट में उत्पादन की शुरुआत कंपनी की पहली बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (BEV) 'ई-विटारा' से की जाएगी। वर्तमान में, हंसलपुर संयंत्र में फ्रॉन्क्स, बलेनो और स्विफ्ट जैसे लोकप्रिय मॉडलों का भी उत्पादन होता है।
निर्यात और सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स
यह प्लांट सिर्फ घरेलू बाज़ार के लिए ही नहीं, बल्कि कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात केंद्र भी है। वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी के कुल वाहन निर्यात का लगभग 47 प्रतिशत हिस्सा इसी संयंत्र से पूरा किया गया।
कंपनी ने यहाँ सस्टेनेबल लॉजिस्टिक्स पर भी ज़ोर दिया है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति कार्यक्रम के तहत, मारुति ने मार्च 2024 में हंसलपुर संयंत्र के अंदर ही भारत की पहली इन-प्लांट रेलवे साइडिंग शुरू की थी। हालांकि, रेल के ज़रिए वाहनों की ढुलाई मार्च 2023 से ही जारी है और अब तक 7.5 लाख से ज़्यादा गाड़ियाँ भेजी जा चुकी हैं। इस पहल से कार्बन उत्सर्जन, ईंधन की खपत और सड़क पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिली है। इस योगदान के लिए, फरवरी 2026 में इस रेलवे साइडिंग को वेरा के वेरिफाइड कार्बन स्टैंडर्ड (VCS) प्रोग्राम के तहत दुनिया की पहली 'मोडल शिफ्ट परिवहन परियोजना' के रूप में मान्यता दी गई।
कौशल विकास पर भी ज़ोर
उत्पादन के साथ-साथ, मारुति सुजुकी गुजरात में कौशल विकास में भी निवेश कर रही है। कंपनी ने भारत और जापान सरकार के सहयोग से मेहसाणा और गांधीनगर में दो जापान-भारत विनिर्माण संस्थान (JIM) स्थापित किए हैं, जहाँ 1,200 से अधिक छात्रों को ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा चुका है।
इनपुट: IANS



