शेयर बाजार: तिमाही नतीजों और विदेशी निवेश पर रहेगी नजर, जानिए अगले हफ्ते कौन से 4 फैक्टर तय करेंगे बाजार की दिशा
भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला कारोबारी हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। पिछले हफ्ते की शानदार तेजी के बाद अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि बाजार अपनी बढ़त कायम रख पाता है या नहीं। समाचार एजेंसी IANS…
भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला कारोबारी हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। पिछले हफ्ते की शानदार तेजी के बाद अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि बाजार अपनी बढ़त कायम रख पाता है या नहीं। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से चार बातों से तय होगी: कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों का रुख, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें।
पिछले हफ्ते बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 3.11% यानी 2,256.94 अंक उछला, जबकि निफ्टी 50 में 2.77% यानी 625.7 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी के पीछे आईटी शेयरों में हुई नई खरीदारी, वैश्विक बॉन्ड यील्ड के दबाव में आई कमी और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की लगातार खरीद को बड़ी वजह माना जा रहा है। शुक्रवार (18 अक्टूबर) को भी बाजार लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद हुआ, जिससे सेंसेक्स 74,729.27 और निफ्टी 23,146.15 के स्तर पर पहुंच गया।
कंपनियों के तिमाही नतीजे
अब बाजार की निगाहें सितंबर तिमाही (Q2) के नतीजों पर टिकी हैं। निवेशक यह देखना चाहेंगे कि क्या हालिया तेजी सिर्फ आईटी सेक्टर तक ही सीमित रहती है या दूसरे सेक्टरों में भी इसका विस्तार होता है। खासकर बैंकिंग, कंज्यूमर और औद्योगिक कंपनियों के नतीजों और उनके प्रबंधन की टिप्पणियों पर सबकी नजर रहेगी। इससे कंपनियों की आय वृद्धि, मार्जिन में सुधार और बाजार में मांग की स्थिति का सही अंदाजा लग सकेगा। कंपनियों का भविष्य को लेकर दिया गया अनुमान (गाइडेंस) भी बाजार की धारणा तय करने में अहम होगा।
निवेशकों का रुख और वैश्विक संकेत
बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रवैया भी महत्वपूर्ण रहेगा। हालांकि उनकी बिकवाली में कुछ कमी आई है, लेकिन अगर यह दोबारा बढ़ती है तो बाजार पर दबाव आ सकता है। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।
इसके अलावा, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदें भी निवेशकों के रडार पर होंगी। अगर बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो शेयर बाजार के लिए यह नकारात्मक हो सकता है, क्योंकि तब निवेशक सुरक्षित समझे जाने वाले फिक्स्ड इनकम की ओर जा सकते हैं।
कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का असर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और किसी भी तरह का भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार के लिए चिंता का सबब बन सकता है। तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने का खतरा रहता है। वहीं, भू-राजनीतिक अस्थिरता वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मचा सकती है।
इनपुट: IANS



