भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद क्यों घटाई? रिपोर्ट में सामने आईं बड़ी वजहें
वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात घटा दिया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर…
वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात घटा दिया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर महीने में रूस से तेल की खरीद में 13% की गिरावट दर्ज की गई। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, यह लगातार दूसरा महीना है जब भारत ने रूस से कम तेल खरीदा है और यह आंकड़ा अप्रैल के बाद सबसे निचले स्तर पर है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष ने लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों को प्रभावित किया है। इस वजह से वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ा और कीमतों में भारी उछाल आया, जिसका असर भारत की खरीद पर भी पड़ा।
प्रमुख रिफाइनरियों ने घटाई खरीद
भारत की बड़ी तेल रिफाइनरियों ने भी रूसी कच्चे तेल का आयात कम किया है। आंकड़ों के मुताबिक, रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी में आयात 27% घटा, जबकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) की पारादीप रिफाइनरी में यह 21% कम हुआ। इसी तरह, नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी ने भी रूस से अपनी खरीद में 8% की कटौती की।
भारत अब भी बड़ा खरीदार
इस गिरावट के बावजूद, भारत सितंबर में रूस के जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिससे सिर्फ चीन ही आगे था। इस दौरान भारत ने रूस से 4.1 अरब यूरो के हाइड्रोकार्बन का आयात किया, जिसमें 88% हिस्सा कच्चे तेल का था। CREA के विश्लेषण के अनुसार, दिसंबर 2022 से अब तक रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 37% और चीन की 50% रही है।
अमेरिकी छूट से राहत
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर रूसी तेल निर्यात से जुड़े कई प्रतिबंधों में छूट दे दी है। यह फैसला इन प्रतिबंधों के लागू होने से ठीक एक दिन पहले लिया गया। ट्रंप ने इसे अमेरिका के "राष्ट्रीय हित" में उठाया गया कदम बताया है, जिससे भारत और चीन को मौजूदा स्तर पर रूसी तेल का आयात जारी रखने में मदद मिलेगी।
इनपुट: IANS



