केरल: राज्यपाल द्वारा पुलिस प्रमुख को सीधे बुलाने पर विवाद, पिनाराई विजयन ने 'संवैधानिक उल्लंघन' का आरोप लगाया
केरल में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने सोमवार को राज्यपाल पर संवैधानिक सिद्धांतों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करने का आरोप…
केरल में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने सोमवार को राज्यपाल पर संवैधानिक सिद्धांतों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करने का आरोप लगाया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विजयन ने कहा कि मुख्यमंत्री या संबंधित मंत्री से सलाह किए बिना राज्य पुलिस प्रमुख को सीधे बुलाना एक अलोकतांत्रिक कदम है।
सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट में, पूर्व मुख्यमंत्री विजयन ने इस कदम को चुनी हुई सरकार को दरकिनार कर राज्य के प्रशासन में सीधे हस्तक्षेप करने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल की यह कोशिश एक समानांतर प्रशासन चलाने जैसी है, जो पूरी तरह से अनुचित है। विजयन ने इस बात पर जोर दिया कि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह और निर्देशों के अनुसार काम करने के लिए बाध्य हैं।
कानूनी और संवैधानिक दलीलें
अपने तर्कों को पुख्ता करने के लिए, पिनाराई विजयन ने नबाम रेबिया मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2016 के एक फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि संविधान का अनुच्छेद 163 राज्यपाल को असीमित विवेकाधीन शक्तियां प्रदान नहीं करता है। विजयन ने सवाल उठाया कि क्या राज्य पुलिस प्रमुख ने संबंधित मंत्री की अनुमति से राज्यपाल से मुलाकात की थी? उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के सीधे हस्तक्षेप से राज्य का पुलिस प्रशासन अंततः आरएसएस के हाथों में जा सकता है।
मौजूदा सरकार की आलोचना
विजयन ने इस मामले पर राज्य की मौजूदा यूडीएफ सरकार के रुख की भी आलोचना की और उसे 'समझौतावादी' बताया। उनके अनुसार, सरकार की चुप्पी को राज्यपाल ने समर्पण के रूप में लिया, जिससे उन्हें अन्य विभागों के कामकाज में भी दखल देने का प्रोत्साहन मिला।
उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के संबंध में राज्यपाल द्वारा लोक भवन में अधिकारियों के साथ की गई एक बैठक का भी उल्लेख किया। विजयन ने दावा किया कि जब विपक्ष ने यह मुद्दा उठाया था, तब भी यूडीएफ सरकार चुप रही और मुख्यमंत्री ने कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि कथित तौर पर मुख्य सचिव ने भी उस बैठक पर नाराज़गी जताई थी। विजयन ने इस मामले को केवल राज्यपाल और सरकार के बीच का आपसी समझौता न मानकर, चुनी हुई सरकार के संवैधानिक और संघीय अधिकारों से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बताया, जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
इनपुट: IANS



