LIC में सरकार की हिस्सेदारी बिक्री: शेयर 8% तक टूटे, जानें निवेशकों पर क्या होगा असर
सरकार द्वारा देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचने की घोषणा के बाद मंगलवार को इसके शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर…
सरकार द्वारा देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में अपनी हिस्सेदारी बेचने की घोषणा के बाद मंगलवार को इसके शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर कारोबार के दौरान LIC का शेयर लगभग 8 प्रतिशत तक लुढ़क गया, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गईं।
समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, दोपहर 12 बजे के करीब LIC का शेयर 7.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 396 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिन के कारोबार में इसने 402.40 रुपये का उच्च स्तर और 390.50 रुपये का निचला स्तर छुआ। इस बिकवाली का मुख्य कारण सरकार का ऑफर फॉर सेल (OFS) लाने का फैसला है।
OFS का पूरा गणित क्या है?
सरकार ने इस OFS के तहत LIC की चुकता इक्विटी शेयर पूंजी का 2.5 प्रतिशत हिस्सा बेचने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, एक 'ग्रीनशू' विकल्प भी है, जिसके तहत अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची जा सकती है। अगर इस विकल्प का पूरा उपयोग होता है, तो सरकार कुल मिलाकर 6.5 प्रतिशत तक इक्विटी बेच सकती है, जिससे उसे 31,000 करोड़ रुपये तक मिलने का अनुमान है।
निवेशकों की धारणा पर इस OFS के लिए तय किए गए फ्लोर प्राइस (न्यूनतम मूल्य) का भी नकारात्मक असर पड़ा। सरकार ने इसका फ्लोर प्राइस 382 रुपये प्रति शेयर रखा है, जो सोमवार को LIC के बंद भाव से करीब 11 प्रतिशत कम है। इसी रियायती मूल्य और बाजार में बड़ी संख्या में शेयरों की आपूर्ति की आशंका के चलते मंगलवार को स्टॉक पर भारी दबाव देखा गया।
निवेशकों के लिए तारीखें और हिस्सेदारी का भविष्य
यह ऑफर फॉर सेल (OFS) मंगलवार को गैर-खुदरा निवेशकों (Non-Retail Investors) के लिए खुला था, जबकि खुदरा निवेशक (Retail Investors) बुधवार से इसमें हिस्सा ले सकेंगे।
मौजूदा समय में, LIC में सरकार की 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है, और सार्वजनिक शेयरधारकों के पास केवल 3.5 प्रतिशत है। यदि प्रस्तावित 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी पूरी तरह बिक जाती है, तो सरकार की हिस्सेदारी घटकर 90 प्रतिशत रह जाएगी। यह कदम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता (Minimum Public Shareholding) नियमों के अनुपालन की दिशा में भी महत्वपूर्ण है, जिसके तहत सेबी ने सरकार को मई 2027 तक अपनी हिस्सेदारी घटाकर 90 प्रतिशत करने का समय दिया है।
इनपुट: IANS



