भारतीय रिटेल बाज़ार में बहार: चार साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची दुकानों की माँग
भारत के रिटेल सेक्टर में इस साल की पहली छमाही (जनवरी-जून 2026) में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। देश के सात प्रमुख शहरों में दुकानों और शोरूम के लिए ली गई कुल जगह (लीजिंग) 62.7 लाख वर्ग फुट तक पहुँच…
भारत के रिटेल सेक्टर में इस साल की पहली छमाही (जनवरी-जून 2026) में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। देश के सात प्रमुख शहरों में दुकानों और शोरूम के लिए ली गई कुल जगह (लीजिंग) 62.7 लाख वर्ग फुट तक पहुँच गई है, जो पिछले चार सालों में किसी भी छमाही का सबसे ऊँचा स्तर है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 10.5% की वृद्धि दर्शाता है।
कमर्शियल रियल एस्टेट सेवा कंपनी जेएलएल की मंगलवार को जारी रिपोर्ट बताती है कि कई बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय खुदरा बाज़ार ने मज़बूत वृद्धि दिखाई है। इस दौरान रिटेल स्पेस की माँग लगातार बनी रही। साल की पहली तिमाही में 30.9 लाख वर्ग फुट जगह लीज पर ली गई, जबकि दूसरी तिमाही में यह आँकड़ा थोड़ा और बढ़कर 31.8 लाख वर्ग फुट हो गया।
घरेलू ब्रांड्स और बड़े शहरों का दबदबा
इस विस्तार में सबसे बड़ी भूमिका घरेलू ब्रांड्स ने निभाई, जिनकी कुल लीजिंग में लगभग 79.1% हिस्सेदारी रही। बाज़ार की ज़्यादातर गतिविधियाँ देश के तीन बड़े शहरों में केंद्रित रहीं। मुंबई (29%), दिल्ली-एनसीआर (24%) और बेंगलुरु (23%) ने मिलकर रिटेल स्पेस की कुल माँग का 75% से अधिक हिस्सा हासिल किया।
शॉपिंग मॉल की आपूर्ति में कमी
एक तरफ जहाँ दुकानों की माँग बढ़ रही है, वहीं नए शॉपिंग मॉल की आपूर्ति में कमी आई है। 2026 की पहली छमाही में केवल 8.2 लाख वर्ग फुट नई मॉल सप्लाई हुई, जो 2025 की पहली छमाही की तुलना में 64% कम है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले छह से नौ महीनों से बड़े ब्रांड्स अच्छे शॉपिंग मॉल्स में जगह की कमी से जूझ रहे हैं। इस वजह से वे अब अपने स्टोर खोलने के लिए वैकल्पिक जगहों पर भी विचार करने लगे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि आपूर्ति की कमी के बावजूद कुल लीजिंग में शॉपिंग मॉल की हिस्सेदारी बढ़ी है। 2025 की पहली छमाही में यह 38.9% थी, जो 2026 की पहली छमाही में बढ़कर 43.1% हो गई। यह ग्राहकों के बीच बेहतर अनुभव वाले संगठित रिटेल स्पेस की बढ़ती प्राथमिकता को दिखाता है।
इनपुट: IANS



