महाराष्ट्र में गरबा पर VHP के निर्देश से मोहन भागवत के 'एक मानवता' बयान पर उठे सवाल, विपक्ष ने साधा निशाना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए 'एक विश्व, एक मानवता' के बयान और भारत में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक हालिया निर्देश के बीच विरोधाभास को लेकर विपक्षी दलों ने…
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका में दिए गए 'एक विश्व, एक मानवता' के बयान और भारत में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक हालिया निर्देश के बीच विरोधाभास को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा था कि जो हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है, वह हिंदू रह ही नहीं जाता। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया था कि हिंदुत्व हर इंसान की गरिमा को स्वीकार करता है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, VHP ने महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया कार्यक्रम के आयोजकों से कहा है कि वे कार्यक्रमों में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाएं। साथ ही, यह भी निर्देश दिया गया है कि प्रतिभागियों की हिंदू पहचान की पड़ताल और पुष्टि की जाए। इसी विरोधाभास को लेकर विपक्षी नेताओं ने RSS प्रमुख पर तंज कसा है।
विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया
राजद सांसद मनोज झा ने महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा, “ऐसा लगता है कि फडणवीस ने शासन का काम किसी और को सौंप दिया है, जैसे अब प्रशासन का काम वीएचपी देखेगी।” मोहन भागवत के न्यूयॉर्क भाषण का जिक्र करते हुए उन्होंने टिप्पणी की, “शायद वह अपना कुछ सामान अमेरिका में ही भूल आए और उसके साथ ही वे बातें भी वहीं छूट गईं जो उन्होंने वहां कही थीं। उन्हें वह सामान वापस लाना चाहिए और अपने लोगों को समझाना चाहिए।” झा ने यह भी कहा कि देश के चरित्र के साथ छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी VHP के इस कदम पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “कौन कहता है कि मुसलमान गरबा नहीं खेल सकते। विश्व हिंदू परिषद के लोग, जो हाल ही में खुद को धार्मिक मामलों का जानकार बताने लगे हैं, ऐसे बयान दे रहे हैं।”
गरबा और भारतीय संस्कृति पर ज़ोर
संजय राउत ने गरबा को देश की परंपरा बताते हुए भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक इतिहास में मुसलमानों के योगदान को याद किया। उन्होंने मनोज झा की बात से सहमति जताते हुए कहा कि मोहन भागवत विदेश में कहते हैं कि हिंदुओं और मुसलमानों में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए, जबकि भारत में उनके संगठन से जुड़े लोग अलग तरह से काम कर रहे हैं। राउत ने कहा, “उन्होंने यह भी कहा था कि जो हिंदू यह मानता है कि मुसलमानों को भारत से निकाल देना चाहिए, वह हिंदू नहीं रह जाता और यहां उनसे जुड़े लोग ऐसी हरकतें कर रहे हैं।” उन्होंने संघ प्रमुख से इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि भारत और न्यूयॉर्क में अलग-अलग बयान देने से काम नहीं चलेगा।
इस विवाद पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने VHP के इस कदम को “पूरी तरह से सांप्रदायिक” बताया। उन्होंने कहा, “गरबा एक सांस्कृतिक त्योहार है और इसमें कोई भी हिस्सा ले सकता है। हम गरबा पर लगी इस रोक की कड़ी निंदा करते हैं।”
इनपुट: IANS



