केरल: निपाह के इलाज में इस्तेमाल दवाओं पर गंभीर सवाल, पूर्व सरकार के दौर की खरीद जांच के दायरे में
केरल में निपाह मरीज़ों के इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के कार्यकाल के दौरान खरीदी और…
केरल में निपाह मरीज़ों के इलाज में इस्तेमाल की गई दवाओं को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के कार्यकाल के दौरान खरीदी और इस्तेमाल की गई दवाओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री ने इस बात की आशंका जताई है कि मरीज़ों को संभवतः क्लिनिकल ट्रायल के लिए बनी दवाएं दी गईं और कुछ दवाओं पर तो निर्माण की तारीख (मैन्युफैक्चरिंग डेट) तक नहीं थी।
यह मामला तब और गंभीर हो गया जब मंत्री ने विधानसभा में बताया था कि 2021 में खरीदी गई रेमडेसिविर दवा, जिसकी एक्सपायरी डेट 30 मई, 2023 थी, का इस्तेमाल बाद के वर्षों में भी किया गया। कोझिकोड में पत्रकारों से बात करते हुए मुरलीधरन ने कहा कि इन आरोपों पर एक व्यापक जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
जांच का दायरा और प्रमुख बिंदु
इस जांच के केंद्र में कई अहम पहलू हैं। कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक से मिली जानकारी के आधार पर शुरू हुई यह पड़ताल आपूर्ति में शामिल विदेशी दवा कंपनियों की भूमिका को भी परखेगी। IANS के हवाले से मिली खबर के मुताबिक, जांच में इस बात का भी पता लगाया जाएगा कि इस लेन-देन में कौन से बिचौलिए शामिल थे और उन्हें इससे क्या वित्तीय लाभ मिला। सरकार का कहना है कि जांच पूरी होने और सभी तथ्य सामने आने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। यह पूरी घटना 2016-26 के दौरान की बताई जा रही है, जब पिनाराई विजयन राज्य के मुख्यमंत्री थे।
एक्सपायर्ड दवाओं के इस्तेमाल का आरोप
आंकड़े बताते हैं कि केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (केएमएससीएल) ने 3 जून, 2021 को 42 लाख रुपए में रेमडेसिविर की 3,000 शीशियां खरीदी थीं। मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड के अनुसार, इनमें से 102 शीशियों का इस्तेमाल 2023-24 में, 34 का 2024-25 में और 10 का 2025-26 में किया गया, जो दवा की समाप्ति तिथि के बाद का समय है। मंत्री ने यह भी बताया कि 2026 में इस्तेमाल हुई 50 शीशियां 12 जून, 2026 को बहरीन से अलग से मंगाई गई थीं।
मेडिकल बोर्ड का गठन
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज के संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख डॉ. आर. अरविंद की अध्यक्षता वाला यह बोर्ड जांच करेगा कि क्या एक्सपायर्ड दवाओं के संदिग्ध इस्तेमाल का मरीज़ों की मौत से कोई संबंध है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि क्या इन दवाओं से अन्य मरीज़ों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने उन्हें जो पत्र भेजा था, उसमें केवल सस्ती दवाओं के खिलाफ आगाह किया गया था, लेकिन क्लिनिकल ट्रायल या एक्सपायर हो चुकी दवाओं का कोई ज़िक्र नहीं था।
इनपुट: IANS



