रविवार, 25 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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प्रदूषण से बचाव: आपकी सेहत के लिए कौन-सा मास्क है सही और कौनसा बेअसर?

सर्दियों की आहट के साथ ही हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे आँखों में जलन और साँस लेने में दिक्कत आम हो जाती है। पराली जलने और गाड़ियों के धुएँ से बढ़ने वाले इस प्रदूषण से बचने के लिए…

प्रदूषण से बचाव: आपकी सेहत के लिए कौन-सा मास्क है सही और कौनसा बेअसर?
(फोटो: IANS)

सर्दियों की आहट के साथ ही हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगता है, जिससे आँखों में जलन और साँस लेने में दिक्कत आम हो जाती है। पराली जलने और गाड़ियों के धुएँ से बढ़ने वाले इस प्रदूषण से बचने के लिए मास्क एक अहम ज़रिया है, लेकिन क्या हर मास्क प्रभावी है? समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गलत मास्क का चुनाव आपको प्रदूषण के खतरनाक कणों से बचाने में लगभग बेअसर साबित हो सकता है।

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हवा में मौजूद सबसे खतरनाक कणों को पीएम 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर 2.5) कहा जाता है, जिनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर से भी कम होता है। ये इतने छोटे होते हैं कि साँस के ज़रिए सीधे फेफड़ों और फिर खून में मिल जाते हैं, जो अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और दिल की बीमारियों का एक बड़ा कारण बनते हैं। वहीं, पीएम 10 कण (10 माइक्रोमीटर या उससे कम) धूल और पराग जैसे मोटे कण होते हैं जो गले में खराश या एलर्जी पैदा करते हैं।

कौन-सा मास्क कितना असरदार?

सर्जिकल मास्क: अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाला नीला या हरा 3-प्लाई मास्क सिर्फ़ पीएम 10 जैसे बड़े धूल कणों और छींक की बूँदों को ही रोक पाता है। यह किनारों से खुला रहने और बारीक कणों को फिल्टर न कर पाने के कारण पीएम 2.5 के खिलाफ लगभग बेअसर होता है।

N95 मास्क: प्रदूषण से बचाव के लिए यह सबसे बेहतरीन और प्रमाणित विकल्प माना जाता है। 'N' का मतलब 'नॉन-ऑयल' और '95' का मतलब इसकी 95% फिल्टर क्षमता से है। यह चेहरे पर अच्छी तरह फिट होकर पीएम 2.5 जैसे 95% बारीक कणों को शरीर में जाने से रोकता है।

N99 और N100 मास्क: ये N95 के उन्नत संस्करण हैं, जो क्रमशः 99% और 99.9% कणों को फिल्टर करते हैं। हालाँकि, इनकी फिल्टर क्षमता अधिक होने के कारण इनमें साँस लेना थोड़ा मुश्किल होता है और मेहनत वाले काम के दौरान घुटन महसूस हो सकती है।

मास्क का इस्तेमाल और बच्चों की सुरक्षा

किसी भी मास्क को हफ़्तों तक इस्तेमाल करना या धोकर पहनना एक बड़ी गलती है। सर्जिकल मास्क केवल एक बार (6-8 घंटे) के लिए होता है। वहीं, N95 या N99 मास्क को कभी पानी से नहीं धोना चाहिए क्योंकि इससे उनकी फिल्टर परत नष्ट हो जाती है। बहुत खराब हवा (AQI) में एक N95 मास्क को लगभग 40 से 50 घंटे तक पहना जा सकता है। अगर मास्क गीला, गंदा हो जाए या साँस लेने में दिक्कत हो, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए।

बच्चों के फेफड़े विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए उन पर प्रदूषण का असर ज़्यादा होता है। वयस्कों वाले N95 मास्क उनके चेहरे पर ठीक से फिट नहीं होते। इसलिए, बच्चों के लिए विशेष 'किड्स N95' मास्क ही खरीदें और सुनिश्चित करें कि यह नाक से ठोड़ी तक पूरी तरह सील हो। ध्यान रहे कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को घुटन के खतरे के कारण मास्क नहीं पहनाना चाहिए।

इनपुट: IANS

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