मेकेदातु परियोजना: कर्नाटक 15 अगस्त तक केंद्र को भेजेगा संशोधित रिपोर्ट, तमिलनाडु के विरोध को बताया बेअसर
कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु जलाशय परियोजना को लेकर कर्नाटक ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है। राज्य के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि कर्नाटक 15 अगस्त तक परियोजना की संशोधि…
कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु जलाशय परियोजना को लेकर कर्नाटक ने अपना रुख और कड़ा कर लिया है। राज्य के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट किया है कि कर्नाटक 15 अगस्त तक परियोजना की संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) केंद्र सरकार को सौंप देगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने यह भी कहा कि इस परियोजना को रोकने का कोई अधिकार तमिलनाडु के पास नहीं है, क्योंकि मंजूरी देने का अंतिम अधिकार केवल केंद्र के पास है।
बुधवार को बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए मंत्री रेड्डी ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर की गई कानूनी चुनौतियों को खारिज कर चुका है, जिससे कर्नाटक के लिए परियोजना पर आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। हम मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाएंगे।"
कानूनी और राजनीतिक स्थिति
रामलिंगा रेड्डी ने बताया कि केंद्र सरकार ने कुछ स्पष्टीकरण मांगते हुए पहले DPR वापस भेज दी थी। अब उन सभी बिंदुओं को शामिल कर संशोधित रिपोर्ट तैयार की गई है, जिसे 15 अगस्त तक भेज दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक सरकार पहले ही मेकेदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर बनाने का नीतिगत फैसला ले चुकी है। रेड्डी ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बावजूद तमिलनाडु राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहा है।
उन्होंने लोकसभा में जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना के हालिया बयान का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि मेकेदातु परियोजना के लिए पड़ोसी राज्यों की सहमति अनिवार्य नहीं है। इसके बावजूद, तमिलनाडु विधानसभा इस परियोजना को रोकने के लिए पहले ही एक प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
कर्नाटक में सर्वदलीय सहमति
मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर कर्नाटक में राजनीतिक दलों के बीच एकजुटता है। हाल ही में हुई एक सर्वदलीय बैठक में पूर्व मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और सभी दलों के प्रतिनिधियों ने परियोजना पर राज्य सरकार के रुख का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, "जब भी भूमि, भाषा और पानी से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं, तब सभी दलों के नेताओं ने कर्नाटक के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम किया है।" इस मामले पर 13 अगस्त से शुरू हो रहे कर्नाटक विधानसभा सत्र में भी चर्चा की जाएगी और मुख्यमंत्री के साथ आगे की रणनीति तय होगी।
इनपुट: IANS



