कर्नाटक में बारिश की कमी से निपटने की तैयारी, सरकार जल्द शुरू करेगी क्लाउड सीडिंग
कर्नाटक में मॉनसून की बेरुखी से पैदा हो रहे जल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार कृत्रिम वर्षा कराने की तैयारी में जुट गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, जल संसाधन मंत्री एन…
कर्नाटक में मॉनसून की बेरुखी से पैदा हो रहे जल संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार कृत्रिम वर्षा कराने की तैयारी में जुट गई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, जल संसाधन मंत्री एन चेलुवरायस्वामी ने बताया कि अगले दो दिनों के भीतर क्लाउड सीडिंग अभियान शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को उम्मीद है कि सरकार उन्हें राहत देगी और इन उम्मीदों को पूरा करना सरकार की ज़िम्मेदारी है।
यह अभियान करीब 60 दिनों तक चलेगा और इस पर लगभग 27 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार इस परियोजना का पूरा वित्तीय भार उठाने के लिए तैयार है, क्योंकि उसकी प्राथमिकता लोगों और पशुओं के लिए पेयजल सुनिश्चित करना है। मंत्री के अनुसार, आने वाली गर्मियों में संभावित समस्याओं से बचने के लिए यह एक एहतियाती कदम है।
अभियान की तैयारी और निगरानी
जल संसाधन मंत्री एन चेलुवरायस्वामी ने विधान सौधा में एक प्रेस वार्ता में बताया कि इस संबंध में दो बैठकें हो चुकी हैं और विभागीय सचिवों को प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान की निगरानी, तकनीकी मार्गदर्शन और मूल्यांकन के लिए मंगलवार शाम तक तीन विशेष समितियों का गठन किया जाएगा। इनमें मॉनिटरिंग कमेटी, टेक्निकल कमेटी और फील्ड ऑपरेशन एवं इवैल्यूएशन कमेटी शामिल होंगी।
मॉनिटरिंग कमेटी का नेतृत्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव करेंगे। वहीं, टेक्निकल कमेटी में आईआईटी, आईआईएससी और भारतीय मौसम विभाग के विशेषज्ञ शामिल होंगे ताकि अभियान को वैज्ञानिक सटीकता के साथ अंजाम दिया जा सके।
कैसे काम करेगी क्लाउड सीडिंग?
यह प्रक्रिया जल संसाधन विभाग द्वारा राज्य के चारों राजस्व मंडलों में चलाई जाएगी। अभियान के तहत रोजाना सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे के बीच करीब 200 उड़ान घंटों का उपयोग किया जाएगा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया तभी संभव है जब आसमान में उपयुक्त बादल मौजूद हों। जिस इलाके में क्लाउड सीडिंग की जाएगी, उसके लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में बारिश होने की संभावना रहती है।
एन चेलुवरायस्वामी ने कहा, "सितंबर महीने में घने बादलों की उपस्थिति अधिक रहने की संभावना है, जबकि अक्टूबर में बादलों की संख्या कम हो सकती है, इसलिए वर्तमान समय इस अभियान के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।"
पिछला अनुभव और इस बार की उम्मीदें
कर्नाटक में पहले भी तीन बार क्लाउड सीडिंग की जा चुकी है, जिसकी सफलता दर लगभग 18 से 20 प्रतिशत रही थी। इस अनुभव को देखते हुए सरकार इस बार बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रही है। मंत्री ने कहा, "यदि इस बार हमें 30 प्रतिशत सफलता भी मिल जाती है तो यह कार्यक्रम पूरी तरह सफल माना जाएगा।" सरकार इस पहल के जरिये झीलों और तालाबों को भरने तथा वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों को सहायता देने का भी प्रयास कर रही है।
इनपुट: IANS



