पाकिस्तान से अवैध नमक आयात: DRI ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का किया पर्दाफाश, 73 लाख किलो की खेप पकड़ी
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो पाकिस्तान पर लगे आयात प्रतिबंधों का उल्लंघन कर भारत में सेंधा नमक ला रहा था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो पाकिस्तान पर लगे आयात प्रतिबंधों का उल्लंघन कर भारत में सेंधा नमक ला रहा था। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'ऑपरेशन डीप मेनिफेस्ट' के तहत की गई इस कार्रवाई में 73 लाख किलोग्राम से ज्यादा सेंधा नमक के अवैध आयात का खुलासा हुआ है। इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
यह पूरा नेटवर्क आयात पर लगे प्रतिबंधों से बचने के लिए एक सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। जांच में पता चला है कि पाकिस्तानी माल को सीधे भारत लाने के बजाय उसे श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह के रास्ते लाया जाता था। पाकिस्तानी पहचान छिपाने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की कंपनियों द्वारा जारी किए गए नकली 'सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन' और बिलों का इस्तेमाल किया गया।
ऑपरेशन और बरामदगी
एक खुफिया सूचना के आधार पर DRI ने 26 सितंबर से 11 अक्टूबर, 2026 के बीच दो हफ्तों तक एक समन्वित अभियान चलाया। इस दौरान गांधीधाम, आदिपुर, वेरावल, पानीपत, पुणे, पटियाला, दिल्ली और मुंबई सहित कई ठिकानों पर तलाशी ली गई। जांच में सामने आया कि मार्च 2026 से अब तक नौ आयातकों ने मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों के जरिए कुल 295 कंटेनर मंगाए थे। इन कंटेनरों में 7,311 मीट्रिक टन नमक था, जिसकी बाजार कीमत लगभग 30 करोड़ रुपए आंकी गई है।
एजेंसी ने कांडला बंदरगाह पर ऐसे पांच कंटेनरों को जब्त किया है, जिनमें 140 मीट्रिक टन सेंधा नमक लदा था। इसकी कीमत 24.41 लाख रुपए है। इसके अलावा, आयातकों के बैंक खातों से नमक की बिक्री से हुई 20.96 लाख रुपए की कमाई भी जब्त कर ली गई है।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में पाकिस्तान, यूएई, श्रीलंका और भारत के नागरिक व उनकी कंपनियां शामिल थीं। हैरानी की बात यह है कि जब माल पाकिस्तान से श्रीलंका भेजा जाता था, तो वहां के सीमा-शुल्क दस्तावेजों में मूल देश 'पाकिस्तान' और अंतिम मंजिल 'भारत' ही दर्ज होता था। लेकिन भारत में आयात के लिए यूएई से जारी किए गए नकली दस्तावेज जमा किए जाते थे, ताकि माल का मूल स्रोत छिपाया जा सके।
इस मामले में कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें आयात करने वाली दो कंपनियों के मालिक/साझेदार, एक कस्टम्स ब्रोकर का जी-कार्ड धारक और दुबई के एक सप्लायर का मालिक शामिल है। इस सप्लायर ने अपने पिता के नाम पर भी एक आयात कंपनी बना रखी थी।
इनपुट: IANS



