शनिवार, 5 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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खड़गे की यात्रा के बाद 'शुद्धिकरण' मामला: उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष पर बेंगलुरु में FIR, जांच के लिए भेजी जाएगी केस फाइल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उत्तराखंड यात्रा के बाद एक मैदान में कथित 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान को लेकर बेंगलुरु में भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार…

खड़गे की यात्रा के बाद 'शुद्धिकरण' मामला: उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष पर बेंगलुरु में FIR, जांच के लिए भेजी जाएगी केस फाइल
(फोटो: IANS)

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उत्तराखंड यात्रा के बाद एक मैदान में कथित 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान को लेकर बेंगलुरु में भाजपा नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कर्नाटक पुलिस जल्द ही इस मामले को आगे की जांच के लिए उत्तराखंड पुलिस को सौंपने की तैयारी कर रही है। यह एफआईआर उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और पार्टी के अन्य सदस्यों के विरुद्ध दर्ज की गई है।

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यह मामला कांग्रेस के अनुसूचित जनजाति विभाग के पूर्व उपाध्यक्ष टी.आर. रामप्पा द्वारा दायर एक शिकायत पर आधारित है। शिकायत के बाद, बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में एक 'जीरो एफआईआर' दर्ज की गई। जीरो एफआईआर का मतलब है कि कोई भी पुलिस स्टेशन, चाहे अपराध कहीं भी हुआ हो, शिकायत दर्ज कर सकता है और फिर उसे संबंधित अधिकार क्षेत्र वाले स्टेशन को हस्तांतरित कर सकता है।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता टी.आर. रामप्पा ने आरोप लगाया है कि 8 अगस्त को नैनीताल जिले के रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक जनसभा को संबोधित किया था। उनके जाने के बाद वहां 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान किया गया। शिकायत में कहा गया है कि यह कृत्य इस जातिवादी धारणा से प्रेरित था कि अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले खड़गे की उपस्थिति से वह स्थान "अपवित्र" हो गया था।

शिकायत में यह भी आरोप है कि महेंद्र भट्ट और भाजपा के अन्य पदाधिकारियों ने मीडिया बयानों के जरिए इस अनुष्ठान का बचाव और समर्थन किया। रामप्पा का तर्क है कि ऐसे बयान जाति आधारित भेदभाव को सार्वजनिक रूप से सही ठहराने और उसे राजनीतिक स्वीकृति देने के समान हैं।

कानूनी कार्रवाई और अगला कदम

बेंगलुरु पुलिस ने 31 अगस्त को मिली लिखित शिकायत पर कानूनी राय लेने के बाद यह जीरो एफआईआर दर्ज की। इसमें नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955, अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, और भारतीय न्याय संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों को शामिल किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि इस एफआईआर को जांच के लिए जल्द ही उत्तराखंड के संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा।

यह घटनाक्रम मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को पत्र लिखे जाने के एक दिन बाद सामने आया। अपने पत्र में खड़गे ने इस मामले में एफआईआर दर्ज न होने पर सवाल उठाया था और नड्डा को उनका आश्वासन याद दिलाया था कि उचित कार्रवाई की जाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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